गुलाबी नहीं, लेकिन बेहद खास होगा यह पूर्ण चंद्रमा—बिना दूरबीन के भी देख सकेंगे शानदार दृश्य

संवाददाता: गोविंद देवल
बदायूँ। अप्रैल 2026 की शुरुआत एक बेहद खास खगोलीय घटना से होने जा रही है। आसमान में ‘पिंक मून’ दिखाई देगा, जिसे लेकर खगोल प्रेमियों में उत्साह बढ़ गया है। अमर पाल सिंह (खगोलविद, वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर) के अनुसार यह अप्रैल महीने की पूर्णिमा है, जिसे पारंपरिक रूप से “पिंक मून” कहा जाता है।
क्या होता है पिंक मून?
खगोलविदों के अनुसार “पिंक मून” कोई अलग प्रकार का चंद्रमा नहीं है, बल्कि यह सामान्य पूर्णिमा ही होती है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के प्रकाश से पूरी तरह प्रकाशित (100% illuminated) दिखाई देता है। इसका रंग सामान्यतः सफेद या हल्का पीला ही होता है।
नाम ‘पिंक’ क्यों पड़ा?
दरअसल “पिंक मून” नाम उत्तरी अमेरिका में खिलने वाले गुलाबी फूल ‘फ्लॉक्स’ (Phlox) से जुड़ा है। यह फूल अप्रैल में खिलता है, इसलिए इस महीने की पूर्णिमा को यह नाम दिया गया। यानी चंद्रमा वास्तव में गुलाबी नहीं होता।
कब दिखेगा पिंक मून 2026?
भारत में इसे देखने का सबसे अच्छा समय 1 अप्रैल 2026 की शाम से लेकर 2 अप्रैल की भोर तक रहेगा। इसका चरम समय 2 अप्रैल सुबह 7:42 बजे (IST) होगा, हालांकि उस समय दिन होने के कारण चंद्रमा स्पष्ट नहीं दिखेगा।
इसलिए 1 अप्रैल की रात और 2 अप्रैल की सुबह तक का समय सबसे उपयुक्त माना गया है।
कैसे देखें यह नजारा?
किसी खुले स्थान (छत/मैदान) पर जाएं
शहर की रोशनी से दूर अंधेरी जगह चुनें
शाम को पूर्व दिशा और सुबह पश्चिम दिशा में देखें
बिना दूरबीन के भी आसानी से देखा जा सकता है
दूरबीन/टेलीस्कोप से चंद्रमा के गड्ढे (क्रेटर्स) भी देखे जा सकते हैं
पूर्णिमा कैसे होती है?
जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में होते हैं और पृथ्वी बीच में होती है, तब चंद्रमा का पूरा प्रकाशित भाग दिखाई देता है। इस स्थिति को वैज्ञानिक भाषा में “सिज़ीगी” (Syzygy) कहा जाता है।
कितने दिन दिखेगा पूरा चंद्रमा?
वैज्ञानिक रूप से पूर्णिमा एक क्षण होती है, लेकिन आमतौर पर 1 दिन पहले और 1 दिन बाद तक चंद्रमा लगभग पूरा गोल दिखाई देता है। यानी 1 और 2 अप्रैल दोनों दिन शानदार दृश्य मिलेगा।
क्या सच में गुलाबी दिखेगा चांद?
खगोलविद अमर पाल सिंह स्पष्ट करते हैं कि चंद्रमा गुलाबी नहीं होगा। हां, कभी-कभी वायुमंडलीय प्रभावों के कारण क्षितिज के पास हल्की गुलाबी या नारंगी झलक दिख सकती है, लेकिन यह स्थायी रंग नहीं होता।
खगोलीय महत्व
यह वसंत ऋतु का पहला पूर्ण चंद्रमा है और कई धार्मिक व पारंपरिक कैलेंडर इससे जुड़े होते हैं। साथ ही इस समय समुद्र में ज्वार-भाटा का प्रभाव भी अधिक होता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, “पिंक मून सिर्फ एक खूबसूरत दृश्य ही नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की सटीक व्यवस्था को समझने का भी अवसर है।”
Budaun Amarprabhat