अंबियापुर के शिव मंदिर में तीसरे दिन का आयोजन; साध्वी सीमा ने भक्ति और संकल्प का संदेश दिया
संवाददाता: गोविंद देवल
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के ग्राम अंबियापुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
मैनपुरी से पधारी कथावाचक साध्वी सीमा ने ध्रुव चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और तपस्या का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को सौतेली माता द्वारा अपमानित किए जाने पर उन्होंने बाल्यावस्था में ही भगवान की शरण लेने का संकल्प लिया।
“अटूट श्रद्धा से मिलती है सफलता”
साध्वी सीमा ने कहा कि ध्रुव ने कठिन जंगलों में कठोर तपस्या कर अटूट श्रद्धा और दृढ़ संकल्प के बल पर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और उनके साक्षात दर्शन प्राप्त किए। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चे मन, विश्वास और समर्पण से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।
कठिनाइयां बनती हैं सफलता की सीढ़ी
उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिनाइयां और अपमान व्यक्ति को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बनाते हैं। ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया और आज भी ध्रुव तारा के रूप में उनकी अटूट आस्था का उदाहरण दिया जाता है।
इस मौके पर सुरेश चंद्र शर्मा (फौजी) सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat