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रामकथा में भक्ति का सागर उमड़ा, समदर्शी महाराज के प्रवचनों ने बांधा समां

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रिसौली में श्री राम कथा महोत्सव का दूसरा दिन; लव-कुश से लेकर तुलसीदास तक के प्रसंगों से किया भावविभोर

संवाददाता: गोविंद देवल

बिल्सी। मेरे राम कथा आयोजन समिति रिसौली की ओर से आयोजित श्री राम कथा महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास सामाजिक संत रवि जी समदर्शी महाराज ने अपने मार्मिक प्रवचनों से श्रद्धालुओं को रामकथा का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर सर्वप्रथम श्रीराम कथा भगवान वाल्मीकि के शिष्यों तथा भगवान श्रीराम और माता सीता के पुत्र लव-कुश ने राम दरबार में गाकर सुनाई थी। वास्तव में यह केवल रामकथा ही नहीं, बल्कि माता सीता की भी कथा है।
“रामायण देती है जीवन जीने की दिशा”
समदर्शी महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा मनुष्य के जीवन को मर्यादित, पवित्र और संतुलित बनाती है तथा वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। श्रीरामायण हमें अपने धर्म पर चलने की प्रेरणा देती है और जीवन के दुख-संताप से मुक्ति का मार्ग दिखाती है।
उन्होंने विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रयागराज में महर्षि भरद्वाज को, नीलांचल में कागभुशुंडी ने गरुड़ को तथा कैलाश पर्वत पर भगवान शिव ने माता पार्वती को रामकथा का उपदेश दिया। गोस्वामी तुलसीदास ने भी रामकथा के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।
जयघोष से गूंजा पंडाल
कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। मुख्य यजमान राधेश्याम पाली सपत्नीक का पंडित सोनू शर्मा ने तिलक व माला पहनाकर स्वागत किया।
इस अवसर पर विपिन कुमार सिंह, सतीश कश्यप, धर्मेंद्र माहेश्वरी, भानू चौहान, अवधेश माहेश्वरी, योगेश बजाज, बुधपाल पाली, राजेश पाली, राजेश सिंह, अतुल सोलंकी, राजू चौहान, रिंकू चौहान, दुष्यंत सोलंकी, मुनेंद्र पाली, पंकज मिश्रा, राजेंद्र प्रसाद, शिवम भारद्वाज, संजीव सिंह सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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