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अवगुणों से बचो, भक्ति ही है एकमात्र रास्ता!

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रिसौली रामकथा में रवि समदर्शी महाराज का सारगर्भित प्रवचन, नारद प्रसंग ने बांधा समां

संवाददाता: गोविन्द देवल

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के रिसौली में आयोजित श्री रामकथा के चौथे दिन भक्तिमय वातावरण के बीच कथावाचक रवि जी समदर्शी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा में उन्होंने मानव जीवन को विचलित करने वाले अवगुणों पर गहन प्रकाश डाला।
कथावाचक ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार ऐसे अवगुण हैं जो आपस में गहराई से जुड़े होते हैं। इनमें से एक भी अवगुण यदि मन में प्रवेश कर जाए तो अन्य अवगुण स्वतः ही व्यक्ति के जीवन में आ जाते हैं और उसे पतन की ओर ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि इनसे बचने का एकमात्र उपाय भगवान का ध्यान, जप, सुमिरन और सत्संग है।
देवर्षि नारद का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि निरंतर नारायण का जाप करने से वे हर संकट से पार पाते थे, लेकिन एक समय कामदेव पर विजय पाने के बाद उनमें अहंकार आ गया। इसी अहंकार के कारण वे माया के प्रभाव में आ गए और भगवान को श्राप तक दे बैठे।
कथा के दौरान विश्वमोहिनी स्वयंवर, नारद मोह भंग, मनु-सतरूपा की कथा, प्रताप भानु का प्रसंग तथा रावण सहित अन्य राक्षसों के जन्म की कथा का विस्तार से वर्णन किया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि जब पृथ्वी गाय के रूप में करुण पुकार करती है, तब देवता, ऋषि-मुनि और ब्राह्मण मिलकर भगवान से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
कथा के यजमान राधेश्याम पाली सहित पंडित सोनू शर्मा, विपिन कुमार सिंह, सतीश कश्यप, धर्मेंद्र माहेश्वरी, भानू चौहान, अवधेश माहेश्वरी, योगेश बजाज, डॉ. वीरेश कुमार सिंह, श्रीकृष्ण राणा, संजीव, बुधपाल पाली, राजेश पाली, राजेश सिंह, अतुल सोलंकी, राजू चौहान, रिंकू चौहान, दुष्यंत सोलंकी, मुनेंद्र पाली, पंकज मिश्रा, राजेंद्र प्रसाद, पुनेश भारद्वाज, शिवम भारद्वाज, संजीव सिंह, मंगलीराम शर्मा, दुष्यंत शर्मा, उत्पल सक्सेना, अमित तोमर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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