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RTI जानकारी छिपाना पड़ा भारी, नगर निगम अधिकारी पर 25 हजार की पेनल्टी

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राज्य सूचना आयोग सख्त, वेतन से होगी वसूली; कई नोटिस के बाद भी नहीं दिया जवाब

संवाददाता : गोविंद देवल

लखनऊ/कानपुर। सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन को नजरअंदाज करना कानपुर नगर निगम के एक अधिकारी को भारी पड़ गया। राज्य सूचना आयोग ने सूचना देने में लापरवाही और आयोग के आदेशों की अवहेलना करने पर नगर निगम कानपुर के कर निर्धारण अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। आयोग ने यह राशि अधिकारी के वेतन से वसूलने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम की अनदेखी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी।

पार्क आवंटन की मांगी थी जानकारी

अपीलकर्ता राधाकृष्ण द्विवेदी ने 14 फरवरी 2024 को आरटीआई आवेदन दाखिल कर गोविंद नगर स्थित पार्क संख्या-158 के आवंटन से जुड़ी जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि पार्क चित्रगुप्त महासभा या किसी अन्य संस्था को किस उद्देश्य से आवंटित किया गया, साथ ही मानचित्र, क्षेत्रफल और केडीए की शर्तों की प्रतियां भी मांगी थीं।

समय पर सूचना न मिलने पर मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा, जहां अपील संख्या S03/A/0036/2025 के तहत सुनवाई शुरू हुई। आयोग ने विपक्षी जनसूचना अधिकारी को कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन उन्होंने न तो जवाब दिया और न ही सुनवाई में उपस्थित हुए।

आयोग ने माना RTI कानून का उल्लंघन

आयोग ने पाया कि अधिकारी का रवैया सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 7(1) का सीधा उल्लंघन है। इसके बाद कर निर्धारण अधिकारी एवं जनसूचना अधिकारी चन्द्र प्रकाश को दोषी मानते हुए धारा 20(1) के तहत 25 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई गई।

आयोग ने नगर आयुक्त कानपुर को आदेश दिया है कि जुर्माने की राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से काटकर जमा कराई जाए। आदेश की प्रति अनुपालन के लिए आयोग के रजिस्ट्रार को भी भेज दी गई है।


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