शनि जयंती और दुर्लभ योगों में पड़ेगा वट सावित्री व्रत
बुधादित्य, गजलक्ष्मी और नवपंचम योग से विशेष बनेगा दिन, महिलाओं के लिए शुभ संयोग
संवाददाता : गोविंद देवल
बदायूं। इस वर्ष वट सावित्री व्रत कई दुर्लभ शुभ संयोगों में मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य Rajesh Kumar Sharma के अनुसार 16 मई 2026, शनिवार को पड़ने वाले इस व्रत पर शनि जयंती के साथ सौभाग्य योग, शोभन योग, बुधादित्य योग, नवपंचम योग, गजलक्ष्मी योग और विपरीत राजयोग का निर्माण हो रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।
16 मई को रखा जाएगा व्रत
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को प्रातः 5:14 बजे से प्रारंभ होकर 17 मई को रात्रि 1:33 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को रखा जाएगा।
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना करेंगी।
पूजा के लिए ये रहेंगे शुभ मुहूर्त
वट सावित्री पूजन के लिए इस बार कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं—
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:07 बजे से 4:48 बजे तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 2:04 बजे से 3:28 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त : शाम 7:04 बजे से 7:25 बजे तक
सर्वमान्य पूजन समय : प्रातः 9:00 बजे तक तथा उसके बाद सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक
इन शुभ समयों में वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
वट वृक्ष में माना जाता है त्रिदेव का वास
आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार धार्मिक मान्यताओं में बरगद के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। यही कारण है कि वट सावित्री व्रत में इसकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
महिलाएं वट वृक्ष पर कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा करती हैं और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। कई स्थानों पर सात तो कई जगह 108 परिक्रमा करने की परंपरा है।
ऐसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा
व्रत के दिन महिलाएं प्रातः स्नान कर स्वच्छ या नए वस्त्र धारण करती हैं और श्रृंगार करती हैं। पूजा की थाली में धूप, दीपक, रोली, अक्षत, फल, भीगे चने और कच्चा सूत रखा जाता है। इसके बाद वट वृक्ष की पूजा कर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया वट सावित्री व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता प्रदान करता है।
वट सावित्री पूजन मंत्र
> अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।
Budaun Amarprabhat