हमीरपुर। सुमेरपुर वर्णिता संस्था द्वारा गुरूवार को “विमर्श विविधा” कार्यक्रम के अंतर्गत “जिनका देश ऋणी है” विषय पर महान स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में संस्था अध्यक्ष डॉ. भवानीदीन ने वीर सावरकर को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके जीवन एवं राष्ट्रसेवा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर मातृभूमि के प्रति सच्चे वफादार थे और देश के प्रति उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जनपद के भंगूर गांव में दामोदर पंत सावरकर एवं राधाबाई के घर हुआ था।
बचपन से ही उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना प्रबल थी। उन्होंने देश एवं विदेश में शिक्षा प्राप्त कर युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरित किया। डॉ. भवानीदीन ने कहा कि वीर सावरकर ने ‘अभिनव भारत’ नामक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की और अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। वे तत्कालीन युवा क्रांतिकारियों के प्रेरणास्रोत रहे। क्रांतिकारी गतिविधियों के चलते उन्हें गिरफ्तार कर 1911 से 1921 तक अंडमान की सेलुलर जेल में कठोर कारावास की सजा दी गई। देश की आजादी के बाद भी वे लंबे समय तक राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय रहे। 26 फरवरी 1966 को उनका निधन हो गया। कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, बाबूलाल, रिचा, भोलू सिंह, राहुल, दयाराम सोनकर, होरी लाल, प्रेम, सागर, प्रिन्स, सतेन्द्र एवं अजय गुप्ता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat