राहुल मौर्य
स्वार (रामपुर)। जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉक्टर राजवीर सिंह ने कहा कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक-शिक्षिकाओं को सरकार टेट से राहत देने की मांग की है। जिलाध्यक्ष का कहना है कि शिक्षक भर्ती के समय सभी ने उस समय की सभी शर्तों को पूरा करने के बाद नौकरी प्राप्त की थी।
शनिवार को प्रेस को जारी बयान में जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार शिक्षकों के पर जबरदस्ती टीईटी थोप रही है।उन्होंने इसे शिक्षकों के साथ विश्वासघात बताया। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षकों ने इसे केवल नौकरी बचाने का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और न्याय की लड़ाई बताया है। उनका कहना है कि उनकी नियुक्तियां उस समय की निर्धारित योग्यता एवं चयन प्रक्रिया के अनुसार हुई थीं, जब टीईटी जैसी कोई अनिवार्यता लागू नहीं थी।
शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक ग्रामीण और शहरी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारने, विद्यार्थियों को शिक्षित करने और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में वर्षों बाद नई शर्तें लागू कर उनके सेवा अधिकारों पर प्रश्नचिह्न लगाना न्यायसंगत नहीं है।
शिक्षक संगठनों के अनुसार शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट) की धारा 23(1) और 23(2) का मूल उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था, न कि पहले से कार्यरत अनुभवी शिक्षकों को असुरक्षा की स्थिति में डालना। वर्ष 2017 में किए गए संशोधनों और जोड़े गए प्रावधानों के बाद टीईटी की बाध्यता उन शिक्षकों पर भी लागू हो गई, जो लंबे समय से सफलतापूर्वक सेवा दे रहे हैं।
शिक्षकों का तर्क है कि अनुभव, समर्पण और वर्षों की सेवा को केवल एक परीक्षा की कसौटी पर नहीं परखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति वैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत हुई और जिन्होंने बिना किसी शिकायत के अपने दायित्वों का निर्वहन किया है, उन्हें सेवा में बने रहने का अधिकार मिलना चाहिए।
वर्तमान में यह मामला न्यायालयों में विचाराधीन है। शिक्षकों को उम्मीद है कि न्यायपालिका 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की परिस्थितियों और उनके दीर्घकालिक योगदान को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएगी।
शिक्षक संगठनों ने सरकार और कोर्ट से मांग की है कि वर्ष 2017 में किए गए संशोधनों एवं संबंधित प्रावधानों पर पुनर्विचार कर 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक-शिक्षिकाओं को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत प्रदान की मांग दोहराई।
Budaun Amarprabhat