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टीएमयू में पेरिफेरल ज्वाइंट मोबिलाइजेशन पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण

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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से दो दिनी वर्कशॉप में कंधें और कूल्हे के ज्वाइंट्स की परेशानियों को दूर करने के विभिन्न तरीकों पर हुई गहनता से चर्चा

मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से पेरिफेरल ज्वाइंट एवम् न्यूरल मोबिलाइजेशन में नवीनतम प्रगति पर दो दिनी वर्कशॉप में डॉ. आशीष डोभाल ने बतौर मुख्य अतिथि पेरिफेरल ज्वाइंट मोबिलाइजेशन के सिद्धांतों और तकनीकों को विस्तार से समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को कंधें और कूल्हे के ज्वाइंट्स की परेशानियों को दूर करने के विभिन्न तरीकों, उनकी संरचना और प्रक्रिया के बारे में गहनता से चर्चा की। डॉ. डोभाल ने नसों की गतिशीलता को बढ़ाने वाली तकनीकों और उनके लाभों पर को भी बताया। उन्होंने न्यूरल स्ट्रक्चर्स के मूवमेंट और उनकी कार्यप्रणाली के महत्व पर जोर दिया। साथ ही तंत्रिका तंत्र की गतिशीलता और कार्यक्षमता को सुधारने के लिए न्यूरल मोबिलाइजेशन के विभिन्न तकनीकी पहलुओं और सुरक्षित अनुप्रयोगों पर भी विशेष ध्यान दिया। उन्होंने बताया, इस तकनीक से तंत्रिका के संकुचन से जुड़े लक्षणों जैसे- दर्द, झुनझुनी, और सुन्नता को कम करने में मदद मिलती है। न्यूरल मोबिलाइजेशन विशेष रूप से सियाटिका, कार्पल टनल सिंड्रोम और संकुचन सिंड्रोम जैसे दीगर सिंड्रोम में फायदेमंद हो सकता है। उन्होंने व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के लिए हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी दिया गया।
इससे पहले डॉ. आशीष डोभाल ने बतौर मुख्य अतिथि, डिपार्टमेंट ऑफ फिजियोथैरेपी की एचओडी प्रो. शिवानी एम. कौल आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके वर्कशॉप का शुभारम्भ किया। अंत में डॉ. डोभाल को मोमेंटो और प्रमाण-पत्र प्रदान देकर सम्मानित किया गया। डिपार्टमेंट ऑफ फिजियोथैरेपी की एचओडी प्रो. शिवानी एम. कौल ने फिजियोथैरेपी स्टुडेंट्स से कहा, कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान और तकनीकों को भविष्य में अपने अभ्यास में शामिल करना उनकी पेशेवर सफलता के लिए आत्मसात करें। वर्कशॉप में समन्वयक श्रीमती नीलम चौहान, सह-समन्वयक श्री नंद किशोर शाह, सुश्री कामिनी शर्मा, श्री रंजीत तिवारी, श्री हरीश शर्मा, सुश्री शिप्रा गंगवार, सुश्री समर्पिता सेनापति, सुश्री हिमानी, सुश्री प्रिया शर्मा, सुश्री सोनम निधि, सुश्री मुस्कान जैन के संग-संग बीपीटी के तीसरे और चौथे वर्ष तथा एमपीटी के पहले और तीसरे सेमेस्टर के स्टुडेंट्स शामिल रहे।


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