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भारत में सातवीं संगीति की पदचाप, विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन

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देश व विदेश से आये बौद्ध धर्म के अनुयायियों नें हिस्सा लिया

लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) एवं समन्वय सेवा संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “भारत में सांतवी संगीति की पदचाप” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, बुद्ध वंदना, धम्म वंदना, उपालि सुत्तं व धम्म पद के गायन के साथ किया गया।
इस कार्यक्रम में संस्थान के सदस्य भिक्षु आर्यवंश, भिक्षु देवानंद वर्धन, महाबोधि सोसाइटी के भिक्षु ज्ञानालोक, मलेशिया से आये पूज्य भदंत तेजावरो, श्रीलंका से आये पूज्य भिक्खु प्रियदर्शी व वेन डॉ० जुलाम्पिटिये पुण्यासार महाथेरो, मलेशिया के फिल्म निर्माता आर० यांग वेई, दिल्ली विश्वविद्यालय से बौद्ध अध्ययन विभाग की डॉ० सुष्मिता, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के निदेशक डॉ० राकेश सिंह, संस्थान के डॉक्टर धीरेंद्र सिंह, अरुणेश मिश्र, आचार्य राजेश चंद्रा, प्रफुल्ल गड्पाल, गिरीश कुमार वर्मा, मुकेश, सुरेश चन्द्र उजाला आदि बौद्ध विद्वानों तथा जन सामान्य ने अपने विचार व्यक्त किए।
भदंत डॉ० तेजावरो ने बताया कि इनके पूर्वज भारत से थे। बौद्ध धर्म के संरक्षण में श्रीलंका का महत्वपूर्ण योगदान है। मौर्य सम्राट अशोक ने बौद्ध संस्कृति को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। बौद्ध धर्म को समझने के लिए थेरवाद, महायान और वज्रयान का ज्ञान होना आवश्यक है। आचार्य राजेश चंद्रा ने पूर्व में आयोजित बौद्ध संगीतियों पर प्रकाश डालते हुए भविष्य में भारत में आयोजित होने वाली सांतवी संगीति की रूपरेखा तथा उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
इसके साथ ही इंटरनेशनल त्रिपिटक चैंटिंग काउंसिल के गठन व कार्यों का वर्णन किया। डॉ० सुष्मिता ने बताया कि भारत में आयोजित होने वाली सांतवी बौद्ध संगीति सैद्दांतिक अखंडता विश्व की एकता, अहिंसा, करुणा, वैश्वीकरण तथा डिजिटल क्रांति के अनुरूप होगी।
डॉ० प्रफुल्ल गड्पाल ने पालि भाषा के विकास के लिए सरकार द्वारा किये गए प्रयासों का उल्लेख किया तथा जन समुदाय को पालि भाषा को पढ़ने, बोलने व सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ० सुरेश उजाला ने अप्प दीपो भवः की भावना पर बल दिया।
निदेशक संस्थान डॉक्टर राकेश सिंह ने संस्थान की गतिविधियों पर संक्षिप्त चर्चा करते हुए बताया कि प्रथम संगीति में विनय व सुत्तपिटक का संकलन हुआ जबकि तृतीय संगीति में अभिधम्मपिटक का संकलन हुआ जिसकी ध्वनि सम्पूर्ण विश्व में सुनाई पड़ी।
इस संगोष्ठी में हम भारत के लोग और प्रेम पत्र नामक दो पुस्तकों के विमोचन किया गया साथ ही मलेशिया से आये फिल्म निर्माता, निर्देशक आर० यांग वेई द्वारा भगवान बुद्ध पर निर्मित दो फिल्मो का संक्षिप्त रूप दिखाया गया। अंत में निदेशक संस्थान ने कार्यक्रम में आए हुए गणमान्य अतिथियों, बौद्ध भिक्षुओं, वक्ताओं, मीडिया कर्मियों, विद्वानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।


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