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एंटीबायोटिक प्रतिरोध दुनिया में गंभीर स्वास्थ्य संकट: प्रो. पथु

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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी विभाग में प्रशिक्षण एवम् विकास सेल नीति के अंतर्गत वॉर अगेन्स्ट रेसिस्टेंसः माइक्रोबियल थ्रेट्स एंड जीनोमिक प्रोफाइलिंग पर फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम- एफडीपी

मुरादाबाद। टीएमयू मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में बायोकेमिस्ट्री की एचओडी प्रो. पथु उषा किरण ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिरोधी संक्रमणों की वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए इस खतरे से लड़ने के लिए उन्नत निदान रणनीतियों पर जोर दिया। डॉ. किरण ने प्रतिरोधी संक्रमणों की वैश्विक चुनौतियों पर कहा, एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जो विश्व स्तर पर लाखों मौतों का सबब बन रहा है। इस खतरे से लड़ने के लिए उन्होंने उन्नत निदान रणनीतियों जैसे- तेज़ और सटीक आणविक परीक्षण विधियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सहयोगात्मक प्रयासों की पुरजोर वकालत करते हुए कहा, ऐसे में शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और नीति-निर्माताओं के एकजुट होने की दरकार है। प्रो. पथु तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी विभाग में ट्रेनिंग एंड डवलपमेंट सेल के तहत वॉर अगेन्स्ट रेसिस्टेंसः माइक्रोबियल थ्रेट्स एंड जीनोमिक प्रोफाइलिंग पर फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम- एफडीपी एवम् वर्कशॉप में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहीं थीं। इससे पूर्व डॉ. किरण ने बतौर मुख्य अतिथि, सीटीएलडी के निदेशक प्रो. पंकज कुमार सिंह, कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल के प्रधानाचार्य प्रो. नवनीत कुमार, एमएलटी की विभागाध्यक्षा प्रो. रुचि कांत आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए गए।

दूसरी ओर वर्कशॉप के तहत प्रतिभागियों को एस्पेटिक सैंपल हैंडलिंग, न्यूट्रियंट एगर, ब्लड एगर, मैककांकी एगर पर कल्चर तकनीकों की व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। ग्राम स्टेनिंग की मदद से बैक्टीरिया की पहचान करना भी सिखाया गया। प्रतिभागियों ने कैटालेज, ऑक्सीडेज, इंडोल, यूरियेज़ और ट्रिपल शुगर आयरन- टीएसआई सरीखे जैव रासायनिक परीक्षणों को करके बैक्टीरियल आइसोलेट की सही पहचान करने का तरीका बताया गया। क्लिनिकल एंड लैबोरेटरी स्टैंडर्ड्स इंस्टीट्यूट- सीएलएसआई के दिशानिर्देशों के अनुसार किर्बी-बाउर डिस्क डिफ्यूजन विधि का उपयोग कर एंटीबायोटिक संवेदनशीलता परीक्षण का प्रशिक्षण भी प्रतिभागियों को दिया गया। दूसरे सत्र में आणविक निदान तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बैक्टीरियल सेल लाइसिस, रासायनिक एवम् अल्कोहल-आधारित डीएनए निष्कर्षण, एगरोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस और यूवी लाइट के तहत डीएनए बैंड्स का अवलोकन शामिल रहा। इन तकनीकों ने प्रतिभागियों को जीनोमिक पैटर्न की व्याख्या करने के महत्वपूर्ण कौशल प्रदान किए, जो नैदानिक निर्णय लेने और संक्रमणों से लड़ने में सहायक हैं। तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. शिव शरण सिंह, सुश्री विवेचना, डॉ. वर्षा राजपूत, सुश्री साक्षी बिष्ट, और सुश्री शिखा पालीवाल ने किया। कार्यक्रम में श्री अमित बिष्ट, श्री रवि कुमार, श्री राकेश कुमार यादव, श्री शिवम अग्रवाल, श्री बैजनाथ दास, श्रीमती अर्चना जैन, सुश्री अदिति त्यागी मौजूद रहे।


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