संवाददाता: गोविंद देवल, बदायूँ
बदायूँ। उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूँ द्वारा एपीएस इंटरनेशनल स्कूल, उझानी में मंगलवार को विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सचिव (पूर्णकालिक) कोमल श्रीवास्तव ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सामाजिक एवं कानूनी विषयों पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकर्षित किया, वहीं विद्यालय द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत की सुंदर प्रस्तुति दी गई।
सचिव कोमल श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में शिक्षा के अधिकार अधिनियम-2009 की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि 1 अप्रैल 2010 से लागू इस कानून के तहत 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी है, जिससे वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अवसर मिल सके।
उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत बच्चों से किसी प्रकार की फीस, यूनिफॉर्म, किताब या अन्य खर्च नहीं लिया जाएगा और न ही उन्हें कक्षा में रोकने या विद्यालय से निकालने का अधिकार किसी स्कूल को है। साथ ही हर विद्यालय में पर्याप्त संसाधन एवं प्रशिक्षित अध्यापकों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
कार्यक्रम में पॉक्सो एक्ट, नए भारतीय न्याय संहिता कानून, गुड टच-बैड टच, किशोर न्याय बोर्ड एवं वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। छात्र-छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया।
शिविर के अंत में बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जरूरतमंदों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है। किसी भी प्रकार के अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में पीड़ित सीधे कार्यालय या संबंधित थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। साथ ही टोल फ्री नंबर 15100 पर कॉल कर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य रवीन्द्र भट्ट सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ, पराविधिक स्वयंसेवक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
वहीं एक अन्य कार्यक्रम में स्काउट गाइड भवन, बदायूँ में बाल विवाह रोकथाम एवं पॉक्सो अधिनियम के तहत जागरूकता शिविर आयोजित किया गया, जिसमें आमजन को कानूनों की जानकारी दी गई। साथ ही आगामी 9 मई 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर पर सुलह-समझौते के माध्यम से वादों के निस्तारण के लिए भी प्रेरित किया गया।
Budaun Amarprabhat