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आचमन के मंच पर बिखरे काव्य रस, डॉ. शिवओम अंबर को मिला पंचम ‘आचमन सम्मान’

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बदायूँ क्लब में देर रात तक झूमे श्रोता, देश के दिग्गज कवियों ने अपनी रचनाओं से बांधा समां

बदायूँ। साहित्य और कला की नगरी बदायूँ में रविवार की रात ‘आचमन फाउंडेशन’ के तत्वावधान में आयोजित पाँचवें भव्य कवि सम्मेलन ने इतिहास रच दिया। बदायूँ क्लब के प्रांगण में आयोजित इस समारोह में देश के कोने-कोने से आए दिग्गज कवियों ने अपनी रचनाओं से काव्य के सभी रसों की ऐसी धारा बहाई कि श्रोता देर रात तक मंत्रमुग्ध होकर अपनी कुर्सियों से चिपके रहे।

दीप प्रज्ज्वलन एवं सम्मान सत्र

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ इस वर्ष के ‘आचमन सम्मान’ से विभूषित प्रख्यात कवि डॉ. शिवओम अंबर (फर्रुखाबाद), नगर विधायक महेश चंद्र गुप्ता, दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता, एसपी ग्रामीण हृदयेश कठेरिया और विभाग प्रचारक विशाल जी ने माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

आचमन संस्था की संस्थापक युगल, विख्यात कवयित्री डॉ. सोनरूपा विशाल एवं प्रसिद्ध व्यवसायी श्री विशाल रस्तोगी ने सभी अतिथियों का भावभीना स्वागत किया। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि डॉ. शिवओम अंबर को साहित्य के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए ‘पाँचवां आचमन सम्मान’ प्रदान किया गया। साथ ही ‘गायेंगे-गायेंगे हम वंदे मातरम’ प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया।

काव्य निशा: जब शब्दों ने छुए सीधे दिल के तार

डॉ. सोनरूपा विशाल के कुशल संचालन में शुरू हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने श्रृंगार, ओज, हास्य और दर्शन का अनूठा संगम पेश किया।

  • डॉ. शिवओम अंबर: अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पंक्तियाँ पढ़ीं— “चंद आंसू चंद आहें और कुछ ग़ज़लें, ये हमारी जिन्दगी भर की कमाई है।”

  • स्वयं श्रीवास्तव: उन्नाव से आए प्रख्यात गीतकार ने अपनी मर्मस्पर्शी रचनाओं से सबको भावुक कर दिया। उन्होंने कहा— “मजबूरियों का नाम हमने शौक रख दिया, और शौक बदलना ही पड़ा घर के वास्ते।”

  • डॉ. नदीम शाद: देवबंद के शायर ने अपनी संजीदा शायरी से खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने पढ़ा— “ज़रा सा सब्र था जो कर गए हम, उसे लगने लगा था मर गए हम।”

  • मोहित शौर्य: गाज़ियाबाद के ओज कवि ने देशभक्ति का जोश भरते हुए कहा— “यह गाँव का रास्ता है सुकून तक जाएगा।”

  • डॉ. मालविका हरिओम: लखनऊ से आईं कवयित्री ने दर्शन और यथार्थ को पिरोते हुए कहा— “तमाम उम्र मंज़िलों की फ़िक्र में गुज़री, वहाँ पहुँच के लगा रास्ते ही बेहतर थे।”

इनके अलावा सर्वेश तिवारी श्रीमुख (बिहार), रामायण धर द्विवेदी (अयोध्या), रश्मि शर्मा (उदयपुर), आयुषि राखेचा (जोधपुर), और स्थानीय शायर कुमार आशीष ने भी अपनी अविस्मरणीय प्रस्तुतियों से आयोजन को सार्थकता प्रदान की। कार्यक्रम की आयोजक डॉ. सोनरूपा विशाल ने भी अपनी पंक्तियों “मन करता है ऐसा हो, तू बिल्कुल मुझ जैसा हो” से श्रोताओं का दिल जीत लिया।

साहित्यिक प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण

सम्मेलन के दौरान एक पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें जनपद के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में नगर के गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्ध जनों और साहित्य प्रेमियों की भारी उपस्थिति रही। सम्मान सत्र का सफल संचालन डॉ. अक्षत अशेष ने किया।

आयोजन में दीपमाला गोयल, सरला स्वरुप, डॉ राम बहादुर व्यथित, अशोक खुराना, शरद शंखधार, मंजुल शंखधार, डॉ. उपदेश शंखधार, सुभाष अग्रवाल, अनूप रस्तोगी, नितिन गुप्ता, प्रशांत गुप्ता, सौरभ शंखधर ज्ञानानंद पांडे, डॉ.भास्कर शर्मा, प्रदीप शर्मा, शोभित वैश्य, शलभ वैश्य, दिवम विशाल, नितिन अग्रवाल, वैभव विजय गुप्ता, डॉ सीके जैन, डॉ. तन्मय रस्तोगी, अमर वैश्य, डॉ. आशीर्वाद वशिष्ठ, कवि नरेंद्र गरल, डॉ. कमला माहेश्वरी, अंजलि शर्मा, अंजू शर्मा, गुंजन गुप्ता, पूजा गुप्ता, रुचि अग्रवाल, सरला चक्रवृती, प्रदीप अग्रवाल, सुबोध गोयल, रचित गोयल, वैभव वैश्य, डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी, डॉ. गायत्री प्रियदर्शनी, डॉ.दीप्ति गुप्ता, डॉ. प्रतिभा गुप्ता, अखिलेश ठाकुर, रवींद्र मोहन सक्सेना, डॉ. अजीत पाल सिंह, सुधांशु शर्मा, हितेंद्र शंखधार, विजय मिश्रा, संजय आर्य, महाराज सिंह, राहुल चौबे, रितिका गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन का सञ्चालन डॉ. अक्षत अशेष ने किया एवं कवि सम्मेलन का सञ्चालन डॉ. सोनरूपा विशाल ने किया।


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