संत रवि समदर्शी महाराज ने सुनाए शिव-विवाह से लेकर रावण जन्म तक के प्रसंग
संवाददाता: गोविंद देवल
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव रिसौली में ‘मेरे राम कथा आयोजन समिति’ द्वारा आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के तीसरे दिन कथा पंडाल में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत माहौल देखने को मिला। सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण कर धर्ममय वातावरण में लीन नजर आए।
कथावाचक सामाजिक संत रवि समदर्शी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि रामकथा सभी कष्टों को दूर करने और मन के संशयों को समाप्त करने वाली है। उन्होंने बताया कि भारद्वाज ऋषि, माता सीता, सती और गरुड़ जैसे पात्रों के संशय भी रामकथा के श्रवण से दूर हुए।
महाराज ने मानस माहात्म्य, याज्ञवल्क्य-भारद्वाज संवाद, सती का पार्वती रूप में जन्म, भगवान शिव-विवाह, सप्त ऋषियों द्वारा पार्वती की परीक्षा, कामदेव दहन, रति को वरदान, शिव बारात, कार्तिकेय जन्म और तारकासुर वध जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
इसके साथ ही उन्होंने जय-विजय श्राप, राक्षसों की उत्पत्ति, रावण, कुंभकर्ण और विभीषण के जन्म तथा धर्म-अधर्म की व्याख्या सरल भाषा में प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा के समापन पर भगवान राम की आरती की गई और प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान कथा यजमान राधेश्याम पाली, पंडित सोनू शर्मा, विपिन कुमार सिंह, सतीश कश्यप, धर्मेंद्र माहेश्वरी, भानू चौहान, योगेश बजाज, राजेश सिंह, अतुल सोलंकी, पंकज मिश्रा, राजेंद्र प्रसाद सहित सैकड़ों श्रद्धालु, माताएं-बहनें उपस्थित
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