“अखिलेश से बैर नहीं, विधायक की खैर नहीं” के नारों से गूंजा इलाका, 2027 में बदलाव का संकेत
संवाददाता: गोविंद देवल | शेखूपुर
शेखूपुर। समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान ने शेखूपुर विधानसभा में सियासी तापमान बढ़ा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व मंत्री आबिद रज़ा के लगातार दौरों के बीच जनता का मूड खुलकर सामने आने लगा है—जहां एक तरफ अखिलेश यादव के प्रति समर्थन दिखा, वहीं स्थानीय विधायक के खिलाफ नाराजगी भी जमकर उभरी।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर आबिद रज़ा पूरे बदायूं जिले में पार्टी का प्रचार कर रहे हैं। इसी क्रम में शेखूपुर क्षेत्र के गांव-गांव में जनसभाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां लोगों द्वारा फूलों की बारिश कर उनका स्वागत किया जा रहा है।
कश्यप समाज ने किया सम्मान
दौरे के दौरान जब आबिद रज़ा कश्यप बाहुल्य गांव ललसी नगला पहुंचे, तो कश्यप समाज के लोगों ने उन्हें प्राचीन शिव मंदिर में ले जाकर महंत द्वारा तिलक लगाकर सम्मानित कराया। यह स्वागत राजनीतिक माहौल में खासा चर्चा का विषय बना रहा।
जनता ने खोला मोर्चा, विधायक पर सीधे आरोप
जनसभाओं में यादव, मुस्लिम और अन्य वर्गों के लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि उन्होंने 2022 में पार्टी और अखिलेश यादव के सम्मान में वोट दिया, लेकिन विधायक बनने के बाद जनप्रतिनिधि ने क्षेत्र की ओर पलटकर नहीं देखा।
सड़क, स्वास्थ्य, थाना-तहसील जैसे बुनियादी मुद्दों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए लोगों ने कहा कि “चार साल में सिर्फ दिखावे के काम हुए, असली समस्याएं जस की तस रहीं।”
ककराला कांड और उत्पीड़न का मुद्दा उठा
जनता ने आरोप लगाया कि कई मामलों में बेगुनाह लोगों पर कार्रवाई हुई, लेकिन स्थानीय विधायक ने उनकी मदद नहीं की। इस मुद्दे पर भी लोगों में खासा आक्रोश देखने को मिला।
नारे से साफ संदेश: 2027 में बदलाव की तैयारी
जनता ने एक स्वर में कहा—“हमें अखिलेश यादव से कोई शिकायत नहीं, लेकिन विधायक से नाराजगी है।” इसी के साथ नारा गूंजा—
“अखिलेश जी से बैर नहीं, विधायक तेरी खैर नहीं”
आबिद रज़ा ने दिया भरोसा
जनता की नाराजगी सुनते हुए आबिद रज़ा ने आश्वासन दिया कि वह उनकी बात पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाएंगे। साथ ही 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए PDA को मजबूत करने और घर-घर पहुंचने की अपील की।
कुल मिलाकर, शेखूपुर में सपा का PDA अभियान जहां एक ओर अखिलेश यादव के लिए समर्थन जुटा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर असंतोष भी खुलकर सामने आ रहा है, जो आने वाले चुनाव में बड़ा असर डाल सकता है।
Budaun Amarprabhat