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“स्कूल या तालाब?” गेट पर जलभराव से जूझते मासूम, 15 साल से सड़क का इंतजार

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हर बारिश में शिक्षा तक पहुंच बनती है संघर्ष, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा—प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

संवाददाता: गोविंद देवल

बरेली। थाना क्षेत्र सुभाष नगर के अंतर्गत ग्राम पंचायत करेली से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां परिषदीय विद्यालय के मुख्य गेट पर जलभराव की समस्या ने बच्चों की पढ़ाई तक पहुंच को चुनौती बना दिया है। छोटे-छोटे मासूम रोजाना पानी और कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
स्थिति इतनी खराब है कि बरसात के दिनों में स्कूल का रास्ता किसी तालाब से कम नहीं दिखता। कई बच्चे फिसलकर गिर भी जाते हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक, इस मार्ग पर पिछले करीब 15 वर्षों से कोई स्थायी सड़क निर्माण नहीं कराया गया है। हर साल बरसात आते ही यह रास्ता जलमग्न हो जाता है और हालात बद से बदतर हो जाते हैं। पिछले वर्ष विरोध प्रदर्शन के बाद अधिकारियों ने केवल मलवा डालकर खानापूर्ति की, लेकिन कुछ ही दिनों में समस्या फिर जस की तस हो गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या वर्षों से चली आ रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामले को टालते रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पक्की सड़क और जल निकासी की व्यवस्था कराई जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।
इस मामले में खंड विकास अधिकारी सुखपाल सिंह ने कहा कि “मामला संज्ञान में आया है, इसे दिखवाकर जो भी स्थायी समाधान संभव होगा, कराया जाएगा।”
अब बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के दावे कर रही है, तो आखिर बरेली के करेली गांव में बच्चे कब तक पानी से जूझकर स्कूल जाने को मजबूर रहेंगे?


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