बोलीं—महिलाओं के अधिकारों से समझौता नहीं, 33% आरक्षण ऐतिहासिक कदम; भ्रम फैलाने वालों को जनता देगी जवाब
संवाददाता: गोविंद देवल
बदायूं:![]()
पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में शुक्रवार को ‘महिला जन आक्रोश अभियान’ के तहत आयोजित प्रेस वार्ता में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जनपद प्रभारी मंत्री गुलाब देवी ने महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी—माताओं, बहनों और बेटियों के सम्मान और भविष्य से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को उन्होंने क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का अधिकार मिलेगा।
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सकारात्मक सहयोग देने के बजाय कुछ दलों ने विरोध और भ्रम फैलाने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीकी कारणों और परिसीमन जैसे मुद्दों के नाम पर इस निर्णय को टालने की कोशिश की गई।
गुलाब देवी ने कहा कि ‘महिला जन आक्रोश अभियान’ किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का व्यापक अभियान है। इसके माध्यम से प्रदेशभर में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद कर सकें।
उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और मिशन शक्ति जैसी पहल ने महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। आज महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि देश के विकास की सक्रिय भागीदार बन रही हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि महिलाओं को समान अवसर और सम्मान देना ही समग्र विकास का आधार है। उन्होंने कुछ दलों द्वारा धर्म आधारित आरक्षण की मांग को अनुचित बताते हुए कहा कि यह संविधान की भावना के विपरीत है और समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास है।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष अमिता उपाध्याय, जिला उपाध्यक्ष सीमा राठौर, जिला कोषाध्यक्ष अनुभव उपाध्याय सहित अन्य पदाधिकारी एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat