कोलकाता/बदायूँ। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। ममता बनर्जी के 15 साल पुराने ‘किले’ को ध्वस्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की चाबियाँ अपने नाम कर ली हैं। चुनाव आयोग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) 87 के आंकड़े के नीचे सिमटती नजर आ रही है।
विशेषज्ञों और शुरुआती विश्लेषणों के अनुसार, भाजपा की इस प्रचंड जीत के पीछे पाँच प्रमुख कारण रहे हैं:
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सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency): टीएमसी के 15 वर्षों के शासन के खिलाफ जनता में असंतोष, विशेषकर भ्रष्टाचार और स्थानीय स्तर पर धांधली के आरोपों ने भाजपा के लिए रास्ता साफ किया।
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जातीय और धार्मिक ध्रुवीकरण: भाजपा ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के वोटों में बड़ी सेंध लगाई है। आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा को लगभग 67% SC और 61% OBC वोट मिले हैं, जिसमें मतुआ और राजबंशी समुदायों का समर्थन निर्णायक रहा।
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महिला मतदाताओं का नया रुख: टीएमसी की मौजूदा योजनाओं से इतर, महिलाओं ने बेहतर सुरक्षा और अधिक वित्तीय लाभों की उम्मीद में भाजपा का साथ दिया।
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पकड़: भाजपा ने न केवल अपने ग्रामीण आधार को मजबूत किया (58 सीटों की बढ़त), बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी टीएमसी को पछाड़ते हुए बड़ी बढ़त हासिल की।
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मुद्दों में बदलाव: पार्टी ने ‘बंगाल बनाम बाहरी’ के नैरेटिव का जवाब स्थानीय मुद्दों जैसे महिला सुरक्षा, रोजगार और भ्रष्टाचार से दिया।
इस जीत की पटकथा लिखने वाले प्रमुख चेहरों में दिल्ली से लेकर कोलकाता तक के दिग्गज शामिल रहे:
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अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री): भाजपा के मुख्य रणनीतिकार के रूप में उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया और ‘बंगाल प्राइड’ के साथ ‘नेशनल इंटीग्रेशन’ का मुद्दा जोड़कर टीएमसी के नैरेटिव को कमजोर किया।
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नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री): पीएम मोदी की छवि और उनके द्वारा किए गए वादों ने बंगाल की जनता, खासकर युवाओं और महिलाओं के बीच भरोसे का सेतु बनाया।
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शुभेंदु अधिकारी (नेता प्रतिपक्ष): स्थानीय स्तर पर टीएमसी के गढ़ को ढहाने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने में शुभेंदु अधिकारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। उन्होंने ममता बनर्जी को उनके अपने ही गढ़ में कड़ी टक्कर देकर पार्टी को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाई।
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नितिन नबीन (चुनाव प्रभारी): जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के प्रबंधन और स्थानीय समीकरणों को साधने का श्रेय नितिन नबीन को जाता है, जिन्होंने चुनाव से पहले ही बड़ी जीत की भविष्यवाणी की थी।
नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर ‘नैरेटिव’ बनाने का आरोप लगाया और शाम तक परिणामों में बदलाव की उम्मीद जताई। हालांकि, चुनाव आयोग के आधिकारिक रुझान भाजपा की स्पष्ट सरकार बनने की पुष्टि कर रहे हैं।
Budaun Amarprabhat