मां ममता, करुणा और त्याग की प्रतिमूर्ति : संजीव शर्मा
गांधी नेत्र चिकित्सालय के बाहर आयोजित हुई संगोष्ठी, मातृ शक्ति के सम्मान में वक्ताओं ने रखे विचार
संवाददाता : गोविंद देवल
बदायूं। भारत स्काउट और गाइड संस्था के तत्वावधान में रविवार को गांधी नेत्र चिकित्सालय के मुख्य द्वार पर अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस श्रद्धा, सम्मान और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर चल रहे निशुल्क शीतल जल सेवा शिविर के दसवें दिन स्काउट-गाइड के बच्चों ने भीषण गर्मी में राहगीरों और दूर-दराज से आए यात्रियों को शीतल जल पिलाकर मानव सेवा का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान मातृ शक्ति के सम्मान में संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें वक्ताओं ने मां के त्याग, संस्कार और जीवन में उनके महत्व पर प्रकाश डाला।
स्काउट संस्था के प्रादेशिक वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं जिला मुख्यायुक्त महेश चंद्र सक्सेना ने कहा कि मां दुनिया में सबसे पूजनीय होती है। मां की असीम कृपा और आशीर्वाद से ही बच्चे महान लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम बनते हैं।
जिला सचिव आलोक कुमार पाठक ने कहा कि मां केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन को संस्कार, स्नेह और मानवता की दिशा देने वाली प्रथम गुरु होती है।
जिला संगठन कमिश्नर मु. असरार ने कहा कि मां का प्रेम निस्वार्थ, पवित्र और असीम होता है। मां अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर कठिनाई सहन कर लेती है। उन्होंने युवाओं से माता-पिता के सम्मान और सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया।
पूर्व जिला ट्रेनिंग कमिश्नर संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि मां ममता, करुणा और त्याग की सजीव प्रतिमा है। मां के चरणों में ही जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा और प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जल जीवन के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार मां का स्नेह और आशीर्वाद जीवन को ऊर्जा और दिशा प्रदान करता है।
गाइड कैप्टन रेनू गुप्ता ने कहा कि मां परिवार की आधारशिला होती है, जो अपने संस्कारों से समाज और राष्ट्र का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि स्काउट संस्था सदैव सेवा, संस्कार और मानवता के कार्यों को आगे बढ़ाती रही है।
कार्यक्रम में कृष्णा, आरुषी, मोहिनी, कीर्ति, वैष्णवी, अनुष्का, रवनीत कौर, रुचित बाबू, हिमांशु, देवांश और रोशनी सहित अन्य स्काउट-गाइड सदस्य मौजूद रहे।
छात्र-छात्राओं ने भी रखे विचार
कीर्ति, छात्रा — पार्वती आर्य कन्या संस्कृत इंटर कॉलेज, बदायूं
“मां ही बच्चे की प्रथम गुरु होती हैं, जो उसे जीवन के अच्छे संस्कार और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।”
कृष्णा, छात्र — पार्वती आर्य संस्कृत कन्या इंटर कॉलेज, बदायूं
“मां पूजनीय और वंदनीय होती है। मां के चरणों में ही स्वर्ग बसता है और उनके आशीर्वाद से ही जीवन में महान लक्ष्य प्राप्त होते हैं।”
Budaun Amarprabhat