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माँ शब्द नहीं, संपूर्ण जीवन का अहसास है : प्रो. सरला चक्रवर्ती

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मातृ दिवस पर भावुक संदेश, मां को बताया ममता, शक्ति और त्याग की अनंत धारा

बोलीं- मां को शब्दों में बांधना सूरज को दीया दिखाने जैसा

संवाददाता : गोविंद देवल

बदायूं। मातृ दिवस के अवसर पर गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय की प्रोफेसर सरला चक्रवर्ती ने मां के प्रति भावनाओं को शब्दों में पिरोते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने मां को जीवन की सबसे पवित्र शक्ति बताते हुए कहा कि “मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक शाश्वत अहसास है।”

उन्होंने कहा कि मदर्स डे पर अक्सर कलम ठहर जाती है, क्योंकि शब्द सीमित हैं और मां असीमित। मां वह अक्षर है जिससे जीवन की वर्णमाला शुरू होती है। वह केवल देह नहीं, बल्कि वह पवित्र ऊर्जा है जो हमारी रगों में रक्त बनकर बहती है।

प्रो. सरला चक्रवर्ती ने कहा कि यदि हम एक बूंद हैं तो मां समंदर की गहराई है, यदि हम एक किरण हैं तो मां अनंत सूर्य का तेज है। हम एक कविता हो सकते हैं, लेकिन मां संपूर्ण साहित्य है।

उन्होंने कहा कि मां वह मौन संवाद है, जो बिना कहे हमारी हर पीड़ा को समझ लेती है और बदले में दुआओं का अथाह भंडार दे देती है।

उन्होंने अपनी भावनाओं को काव्यात्मक अंदाज में व्यक्त करते हुए कहा—

“हम एक शब्द हैं, तो वह पूरी भाषा है,
हम प्यास हैं, तो वह तृप्ति की आशा है।
देह मिटकर भी जो रूह में घुली रहे,
बस यही तो मां की सच्ची परिभाषा है।”

उन्होंने कहा कि मां वह आदि शक्ति है, जिसका न कोई प्रारंभ है और न ही अंत। मां देह बनकर गोद में खिलाती है और रूह बनकर जीवनभर साथ निभाती है।

मातृ दिवस पर उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर घर में मां की ममता का मीठा झरना सदा बहता रहे और मां का आशीर्वाद हर व्यक्ति के जीवन को प्रकाशित करता रहे।

उन्होंने अंत में कहा कि “मां को शब्दों में बांधना सूरज को दीया दिखाने जैसा है, बस उनके पास बैठकर उनके हाथों को चूम लेना ही सबसे बड़ी इबादत है।”


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