गोवर्धन लीला प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, भक्ति गीतों से गूंजा कथा पंडाल
संवाददाता : गोविंद देवल
उझानी। नगर के बड़ा हनुमान मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का सातवें दिन भक्तिमय वातावरण में समापन हुआ। कथा शिरोमणि स्वामी रामचन्द्राचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष गूंजते रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा के दौरान महाराज श्री ने कहा कि जब देवराज इंद्र ने अभिमानवश ब्रजभूमि पर मूसलाधार वर्षा कर संकट उत्पन्न किया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों, गौवंश और प्रकृति की रक्षा की। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग मानवता, करुणा और प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि अहंकार का अंत निश्चित है और भगवान की कृपा के सामने उसका कोई अस्तित्व नहीं रहता। श्रद्धालुओं से उन्होंने जीवन में अहंकार, क्रोध और लोभ का त्याग कर सेवा, सत्संग और भक्ति का मार्ग अपनाने का आह्वान किया।
स्वामी रामचन्द्राचार्य महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में प्रकृति संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। गोवर्धन पूजा जल, वन, पर्वत और गौ सेवा के महत्व को समझाने वाली परंपरा है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जहां होती है, वहां धर्म, संस्कार और सद्भाव का वातावरण स्वतः निर्मित हो जाता है। भागवत कथा जीवन को सत्य, प्रेम और मानवता की दिशा देने वाला आध्यात्मिक प्रकाश है।
कथा के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति की ओर से कथा व्यास का माल्यार्पण कर सम्मान किया गया तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई।
इस अवसर पर कमलाकांत महाराज, राजीव लोचन महाराज, धर्मेंद्र कुमार शर्मा, विपिन कुमार शर्मा, ममता शर्मा, आरती शर्मा, अजब सिंह, सचिन सिंह, जसवीर यादव, प्रमोद कुमार, आनंद मिश्रा, राजाबाबू सिंह, अतिवीर यादव, ज्ञान चंद्र शर्मा, भगवान स्वरूप, ब्रह्मानंद शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat