
हमीरपुर। सुमेरपुर वर्णिता संस्था द्वारा 12 मई को क्रांतिकारी बालकृष्ण चाफेकर की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष डॉ0 भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि बालकृष्ण चाफेकर मातृभूमि के सच्चे सेवक और युवा क्रांतिकारी थे, जिनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि बालकृष्ण चाफेकर का जन्म वर्ष 1873 में पुणे के चिंचवड़ गांव में हरि विनायक और द्वारका चाफेकर के घर हुआ था। उस समय पुणे में प्लेग जैसी घातक महामारी फैली हुई थी, लेकिन अंग्रेजों की नाइंसाफी और उदासीनता के कारण हजारों भारतीय इसकी चपेट में आ गए। अंग्रेजी शासन के अत्याचारों से आक्रोशित चाफेकर बंधुओं ने देशहित में संघर्ष का मार्ग चुना। डॉ0 भवानीदीन ने बताया कि बालकृष्ण तीन भाइयों में से एक थे और उन्हें अंग्रेज सरकार ने गिरफ्तार कर 12 मई 1899 को फांसी पर लटका दिया था। कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, प्रेम, रिचा, रामनारायण सोनकर, रामबाबू, दयाराम सोनकर, महावीर प्रजापति, राहुल, सतेंद्र और अजय गुप्ता सहित कई लोग उपस्थित रहे।
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