अपहरण कर हत्या और साक्ष्य छिपाने के मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा, प्रत्येक पर 18 हजार रुपये जुर्माना
संवाददाता : गोविंद देवल, बदायूं
बदायूं। ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत बदायूं पुलिस को हत्या के एक चर्चित मामले में बड़ी सफलता मिली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण में प्रभावी पैरवी के चलते माननीय न्यायालय ने पांच अभियुक्तों को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 18 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामला थाना Moosajhag Police Station में दर्ज मुकदमा संख्या 32/2014 से जुड़ा है, जिसमें धारा 364, 302, 149 एवं 201 आईपीसी के तहत कार्रवाई की गई थी। अभियुक्तों में कर्रु उर्फ तारीफ सिंह, जागेश निवासी ग्राम धिलौरा थाना मूसाझाग, कमलेश निवासी दियुचरी थाना हजरतपुर, औमान सिंह निवासी हर्रनगला थाना हजरतपुर तथा कल्लू निवासी नगला हर्रे थाना हजरतपुर शामिल थे। मामले के एक आरोपी कमलेश पुत्र उदयवीर की मृत्यु हो चुकी है।
प्रकरण की विवेचना उप निरीक्षक रुकमपाल सिंह यादव द्वारा पूरी कर आरोप पत्र जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय बदायूं में दाखिल किया गया था। इस मामले को पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत चिन्हित कर अभियोजन विभाग से समन्वय स्थापित किया गया।
मॉनीटरिंग सेल जनपद बदायूं और पैरोकार आरक्षी विकास वर्मा की प्रभावी पैरवी के बाद न्यायालय ने सभी पांच दोषियों को धारा 364/149 आईपीसी में 10-10 वर्ष कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा 302/149 आईपीसी में आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 201/149 आईपीसी में पांच-पांच वर्ष कारावास और तीन-तीन हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया।
अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
मामले में प्रभावी पैरवी करने वाले पैरोकार आरक्षी विकास वर्मा, विवेचक उप निरीक्षक रुकमपाल सिंह यादव एवं लोक अभियोजक अनिल कुमार राठौर की भूमिका को सराहनीय बताया गया है।
Budaun Amarprabhat