शिक्षकों के संस्कार जीवन को बनाते हैं पवित्र : अजयवीर
गायत्री शक्तिपीठ में शिक्षक गरिमा सम्मान समारोह, 8 प्रधानाचार्य, 24 शिक्षक और 50 छात्र सम्मानित
संवाददाता : गोविंद देवल
बदायूं। गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर आयोजित शिक्षक गरिमा सम्मान समारोह में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के विजेता छात्र-छात्राओं, प्रधानाचार्यों और शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अजयवीर सिंह यादव ने मां गायत्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान परिव्राजक सुमित कुकरेती और सुमन कुकरेती ने वेदमंत्रोच्चारण के साथ पूजन कराया।
मुख्य अतिथि अजयवीर सिंह यादव ने कहा कि शिक्षकों से मिले श्रेष्ठ संस्कार और विचार व्यक्ति के जीवन को पवित्र बना देते हैं। शिक्षक ही समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव हैं।
“शिक्षकों का तप शिष्यों के भविष्य को संवारता है”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं वनस्थली आवासीय इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य चंचल शर्मा ने कहा कि शिक्षक अपने जीवन का तप और अनुभव विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित करते हैं। छात्र-छात्राओं को शिक्षकों से प्राप्त ज्ञान का सदुपयोग कर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्य प्रबंध ट्रस्टी सुरेंद्र नाथ शर्मा ने शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। वहीं जिला समन्वयक नरेंद्र पाल शर्मा ने प्रदेश भ्रमण पर निकले ज्योति कलश के जिले में आगमन और पूजन कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।
मेधावी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों का हुआ सम्मान
समारोह में विभिन्न विद्यालयों के मेधावी छात्र-छात्राओं, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को गायत्री मंत्र का पटका और युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला संयोजक प्रेमचंद शर्मा ने बताया कि शिक्षक गरिमा शिविर में 8 प्रधानाचार्यों, 24 शिक्षकों और 50 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में सुखपाल शर्मा, ममता पाल, नत्थूलाल शर्मा, संतोष मिश्रा, पूरन देवी, सुशील कुमार, महेश शाक्य, मदनलाल झा, रजनी मिश्रा, शोभना भारद्वाज, रामचंद्र प्रजापति और संजीव कुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। संचालन मुख्य प्रबंध ट्रस्टी सुरेंद्र नाथ शर्मा ने किया।
Budaun Amarprabhat