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20 मई को दिखेगी चंद्रमा और बृहस्पति की अद्भुत युति

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20 मई को दिखेगी चंद्रमा और बृहस्पति की अद्भुत युति

सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में बनेगा मनमोहक नज़ारा, रात 10 बजे तक रहेगा दृश्य

संवाददाता : गोविंद देवल

बदायूं। 20 मई 2026 की शाम खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाली है। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में चंद्रमा और सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति की शानदार खगोलीय युति देखने को मिलेगी। यह दृश्य रात लगभग 10 बजे तक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। खास बात यह है कि इस अद्भुत खगोलीय घटना को बिना किसी दूरबीन के भी खुली आंखों से आसानी से देखा जा सकेगा।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 20 मई की शाम पश्चिम दिशा में चमकीले अर्धचंद्राकार चंद्रमा के पास बृहस्पति ग्रह दिखाई देगा। दोनों खगोलीय पिंड आकाश में एक-दूसरे के बेहद करीब प्रतीत होंगे, जिससे यह दृश्य अत्यंत आकर्षक लगेगा। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह केवल दृष्टि-रेखा का प्रभाव होता है और वास्तव में दोनों के बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी बनी रहती है।

क्या होती है खगोलीय युति

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, खगोल विज्ञान में “युति” उस स्थिति को कहा जाता है जब पृथ्वी से देखने पर दो खगोलीय पिंड आकाश में एक-दूसरे के बहुत निकट दिखाई देते हैं। इस दौरान चंद्रमा और बृहस्पति लगभग समान खगोलीय देशांतर पर नजर आएंगे।

कितना होगा कोणीय अंतर

उन्होंने बताया कि 20 मई को चंद्रमा और बृहस्पति के बीच लगभग 3 डिग्री का कोणीय अंतर रहेगा। यह दूरी इतनी कम होगी कि दोनों को एक साथ आसानी से देखा जा सकेगा। सामान्य दूरबीन और बाइनोक्युलर से यह दृश्य और भी सुंदर दिखाई देगा।

मिथुन तारामंडल में दिखेगा अद्भुत नज़ारा

यह युति पश्चिमी आकाश में मिथुन तारामंडल के क्षेत्र में दिखाई देगी। इसी क्षेत्र में प्रसिद्ध तारे कैस्टर और पोलक्स भी मौजूद रहेंगे। खगोलविदों के अनुसार इसी क्षेत्र में शुक्र ग्रह भी दिखाई देगा और आने वाले दिनों में बृहस्पति तथा शुक्र ग्रह एक-दूसरे के करीब आते नजर आएंगे।

अर्थशाइन भी बनेगा आकर्षण

20 मई को दिखाई देने वाला चंद्रमा लगभग चार दिन पुराना बढ़ता हुआ अर्धचंद्र होगा। इस दौरान चंद्रमा के अंधेरे हिस्से पर पृथ्वी से परावर्तित हल्की रोशनी भी दिखाई दे सकती है, जिसे “अर्थशाइन” कहा जाता है। इससे यह दृश्य और भी आकर्षक बन जाएगा।

पृथ्वी पर नहीं पड़ेगा कोई नकारात्मक प्रभाव

खगोलविद अमर पाल सिंह ने स्पष्ट किया कि यह घटना पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है। इसका पृथ्वी पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि ऐसी खगोलीय घटनाएं लोगों में विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा बढ़ाती हैं तथा बच्चों और युवाओं को ब्रह्मांड की गतिविधियों को समझने का अवसर प्रदान करती हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे 20 मई की शाम पश्चिम दिशा में खुला स्थान चुनकर इस अद्भुत खगोलीय दृश्य का आनंद अवश्य लें।


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