
सुमेरपुर (हमीरपुर)। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था द्वारा आयोजित “विमर्श विविधा” कार्यक्रम के अंतर्गत “जिनका देश ऋणी है” श्रृंखला में गदर पार्टी के सूत्रधार शहीद करतार सिंह सराभा की जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। संस्था के अध्यक्ष डॉ. भवानीदीन ने कहा कि करतार सिंह सराभा आजादी के संघर्ष के निडर योद्धा थे। देश के प्रति उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि सराभा का जन्म 24 मई 1896 को लुधियाना के सराभा गांव में मंगल सिंह और साहिब कौर के घर हुआ था। उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका के बर्कले विश्वविद्यालय गए थे। डॉ. भवानीदीन ने बताया कि अमेरिका में भारतीयों के साथ होने वाले व्यवहार से सराभा काफी आहत हुए। एक बार उन्होंने जिस महिला के यहां किराए पर रहते थे, उसके घर को विशेष रूप से सजा देखा। पूछने पर महिला ने बताया कि उस दिन अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस है। इसी घटना से उनके भीतर राष्ट्रवादी विचारों को और मजबूती मिली। वे पहले से ही लाला लाजपत राय जैसे नेताओं से प्रभावित थे।
उन्होंने कहा कि 15 जुलाई 1913 को गदर पार्टी के गठन में करतार सिंह सराभा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्ष 1915 में देश में आजादी के दूसरे प्रभावी संग्राम की योजना तैयार की गई, जिसमें सराभा की सक्रिय भागीदारी थी। हालांकि भितरघात के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी। बाद में सराभा और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया तथा मात्र 19 वर्ष की आयु में उन्हें लाहौर में फांसी दे दी गई। डॉ. भवानीदीन ने कहा कि शहीद भगत सिंह भी करतार सिंह सराभा को अपना आदर्श मानते थे। कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, प्रेम, सागर, महावीर प्रजापति (इलेक्ट्रीशियन), रिचा, भोलू सिंह, बाबूलाल, सतेन्द्र एवं अजय गुप्ता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat