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301वीं अहिल्याबाई होलकर जयंती की अनुमति न मिलने पर हंगामा, पाल समाज आहत

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  • प्रशासनिक रोक से भव्य तैयारियों पर फिरा पानी, आयोजकों ने लगाया राजनीति का आरोप

  • इस्लामिया इंटर कॉलेज में जुटने वाले थे 25 हजार लोग, सांसद आदित्य यादव और नीरज मौर्या भी होने वाले थे शामिल

अमर प्रभात ब्यूरो
बदायूं।
जनपद में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती समारोह को लेकर प्रशासनिक अनुमति न मिलने का एक बड़ा मामला गरमा गया है। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के इस्लामिया इंटर कॉलेज ग्राउंड में पिछले दो दिनों से चल रही भव्य तैयारियों और विशाल पंडाल को अनुमति निरस्त होने के बाद हटाना पड़ा, जिससे लाखों रुपये की व्यवस्थाओं को पलीता लग गया। इस घटनाक्रम से पाल समाज और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है।

सांसदों का होना था आगमन, 25 हजार लोगों के जुटने की थी उम्मीद

पाल समाज और समाजवादी पार्टी द्वारा इस जयंती समारोह को बेहद भव्य रूप से मनाने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में दो दिनों से विशाल टेंट लगाया जा रहा था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नवनिर्वाचित बदायूं सांसद आदित्य यादव एवं आंवला सांसद नीरज मौर्या को शामिल होना था। आयोजकों के मुताबिक, इस भव्य आयोजन में जिले भर से लगभग 25 हजार लोगों के जुटने की उम्मीद थी, लेकिन आखिरी वक्त पर अनुमति न मिलने से कार्यक्रम ठप हो गया।

भाजपा के दबाव में प्रशासन ने रोकी अनुमति: सुनीता पाल

समारोह की मुख्य आयोजक, पाल समाज की समाजसेविका और समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता सुनीता पाल (जो दातागंज विधानसभा से टिकट की दावेदार भी हैं) ने इस पूरी कार्रवाई के लिए सरकार और जिला प्रशासन को आड़े हाथों लिया। सुनीता पाल ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा, “विशाल टेंट और हमारी भव्य व्यवस्थाओं को देखकर सत्ताधारी भाजपा घबरा गई और उसने प्रशासन पर दबाव बनाकर हमारी अनुमति को जानबूझकर खारिज करवा दिया।”

2027 के चुनाव में मिलेगा इसका जवाब

सुनीता पाल ने कड़े शब्दों में कहा कि देवी अहिल्याबाई होलकर ने सर्वधर्म और समाज के कल्याण के लिए ऐतिहासिक कार्य किए थे। वे पूरे देश की आदर्श हैं। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “सभी समाज के लोग मिलकर अपने-अपने महापुरुषों और भगवानों की जयंती धूमधाम से मनाते हैं, लेकिन पाल समाज को अपनी देवी की जयंती मनाने से क्यों रोका गया? पूरा पाल समाज अपनी आराध्य देवी का यह अपमान कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और इसका करारा जवाब वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में वर्तमान सरकार को मिल जाएगा।”

फिलहाल, टेंट और पंडाल को हटाए जाने के बाद पूरे पाल समाज में गहरा दुख और असंतोष है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस प्रशासनिक रोक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।


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