बदायूं। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सोमवार, 6 जुलाई 2026 को रात 11 बजे (भारतीय समयानुसार) पृथ्वी अपनी कक्षा में उस बिंदु पर पहुंचेगी, जहां वह पूरे वर्ष में सूर्य से सबसे अधिक दूरी पर होती है। इस खगोलीय घटना को अपसौर (Aphelion) कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा पूर्ण गोलाकार नहीं बल्कि दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) कक्षा में करती है। इसी कारण वर्ष में एक समय ऐसा आता है जब पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है, जिसे उपसौर (Perihelion) कहा जाता है, जबकि सबसे दूर होने की स्थिति को अपसौर (Aphelion) कहा जाता है। इस समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 15.21 करोड़ किलोमीटर होती है।
अमर पाल सिंह ने बताया कि आम धारणा है कि सूर्य से अधिक दूरी होने पर पृथ्वी पर ठंड बढ़ जानी चाहिए, जबकि ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि ऋतुओं का निर्धारण सूर्य से दूरी नहीं, बल्कि पृथ्वी की धुरी के लगभग 23.5 डिग्री झुकाव से होता है। यही कारण है कि जुलाई में भारत सहित पूरे उत्तरी गोलार्ध में गर्मी और वर्षा का मौसम रहता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में सर्दी होती है।
उन्होंने बताया कि सूर्य से दूरी बढ़ने के कारण पृथ्वी तक पहुंचने वाली सौर ऊर्जा में लगभग 6 से 7 प्रतिशत की कमी आती है, लेकिन इसका मौसम पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ता। पृथ्वी की धुरी का झुकाव इस प्रभाव की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है।
खगोलविद ने जर्मन वैज्ञानिक जोहान्स केपलर के दूसरे नियम का उल्लेख करते हुए बताया कि ग्रह सूर्य के निकट होने पर अधिक गति से और दूर होने पर अपेक्षाकृत धीमी गति से चलते हैं। इसी कारण अपसौर के समय पृथ्वी की कक्षीय गति कुछ कम हो जाती है और उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों की अवधि सर्दियों की तुलना में कुछ अधिक लंबी रहती है।
उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक जानकारियों से सावधान रहने और वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करने की अपील की। अमर पाल सिंह ने कहा कि अपसौर आधुनिक खगोल विज्ञान की एक महत्वपूर्ण एवं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित घटना है, जो ग्रहों की गति, गुरुत्वाकर्षण और पृथ्वी-सूर्य प्रणाली को समझने का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
Budaun Amarprabhat