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निडर बनने के लिए पाप से दूर रहें, चरित्र को उज्ज्वल बनाएं: आचार्य संजीव रूप

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संवाददाता गोविन्द देवल
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में रविवार को आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ऋग्वेद पारायण यज्ञ से हुई। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ से पूर्व चारों वेदों के 31 मंत्रों का वाचन किया।

सत्संग को संबोधित करते हुए आचार्य संजीव रूप ने कहा कि मनुष्य को सदैव निडर होकर जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जानबूझकर पाप नहीं करता, गलत कार्यों से दूर रहता है, देश के संविधान का पालन करता है और अपने चरित्र को उज्ज्वल बनाए रखता है, वही वास्तव में निर्भय रहता है।

उन्होंने कहा कि चरित्र निर्माण के लिए आत्मिक उन्नति हेतु स्वाध्याय और साधना, सामाजिक उन्नति के लिए सेवा और परोपकार तथा शारीरिक उन्नति के लिए नियमित व्यायाम और सात्विक आहार आवश्यक है। उन्होंने सभी से सदाचार और वैदिक जीवन मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

यज्ञ के उपरांत कुमारी तानिया आर्य, कुमारी कौशिकी आर्य और कुमारी उर्वशी आर्य ने “सुखी बसे संसार सब, दुखिया रहे न कोय…” भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इस अवसर पर राकेश आर्य, श्रीमती लीलावती देवी, नौबतराम आर्य, श्रीमती मुन्नी देवी, श्रीमती कमलेश कुमारी, श्रीमती सूरजवती देवी सहित आर्य संस्कारशाला के बच्चे एवं अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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