Breaking News

माँ तुझे सलाम

Spread the love

मदर्स डे पर स्पेशल


श्रीमती हरवंश डांगे
रिटायर्ड प्रिंसिपल

माँ संवेदना हैं, भावना हैं, एहसास हैं, माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है। माँ सिर्फ एक शब्द नहीं जीवन की वह भावना होती है जिसमें स्नेह, धैर्य, विश्वास कितना कुछ समाया होता है। माँ एक ऐसा शब्द है जो दिल को छू जाता हैं। माँ बच्चे के लिए हर गम को भुला देती है, दर्द मिटा देती हैं। माँ शब्द ऐसा जादू है जो मन में समा जाता है माँ अपनी मुस्कान, प्यार, लोरी से हर घाव को भर देती हैं। तभी तो कहा है,
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। माँ सबसे महान रचना है ईश्वर की, क्योंकि ईश्वर हर स्थान पर नहीं जा सकते इसलिए ईश्वर ने माँ की रचना की है। सिर्फ माँ और बच्चे का रिश्ता ऐसा होता है जिसमें कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होती। माँ से बढ़कर कोई स्वर्ग नहीं है, चाहे जितने तीर्थ कर लें। माँ गले से लगाकर बच्चों को सुख में सुलाती हैं। बच्चा बीमार होता है माँ लोरी गाकर रात भर जाग कर ईश्वर से बच्चों की सलामती की प्रार्थना करती है। किसी कवि ने सत्य कहा है, माँ को नाराज करना इंसान की भूल है। मां के कदमों की मिट्टी में जन्नत की धूल हैं। हमारे समाज में माँ का विशेष एवं महत्वपूर्ण स्थान हैं। मन में उपरोक्त इतने गुण होते हुए भी मां सवेरे सबसे पहले उठकर पति का नाश्ता, बच्चों को बस तक ले जाना, सास ससुर की सेवा, कपड़े धोना, काम करते-करते रात को सबसे बाद में सोती है। यह सिलसिला गांव में ही नहीं शहरों में भी देखा जा सकता है। कहीं-कहीं तो माँ नौकरी और घर की दोहरी भूमिका भी निभाती है। क्या घर के सदस्यों ने कभी पूछा है, की मां आपने खाना खाया? क्या किसी ने मां के चेहरे की थकान उदासी को देखा?
मैं पूजनीय माताओं से कहना चाहती हूं की हेल्थ इस वेल्थ, आप अपनी जिम्मेदारियों के लिए अपनी रुचि को तिलांजलि मत दीजिए। आप संगीत सुनिए, गुनगुनाइए, टहलने जाइए, स्वास्थ्य के लिए जिम जाइए बच्चों एवं पति के साथ पिकनिक मनाइए। अपने बुजुर्गों को तीरथ करवाइए। खाने में तो गिनती के 36 व्यंजन होते हैं, लेकिन बीमारियों की कोई गिनती नहीं कोई सीमा नहीं।
उम्र बढ़ाने के बजाय घट जाती तो क्या बात थी।
जिंदगी मां की गोद में कट जाती तो क्या बात थी।
यदि हम शब्द हैं तो माँ पूरी भाषा है। माँ रोते हुए बच्चों की खुशनुमा पालना है। माँ मरुस्थल में नदी का मीठा झरना है। सब नाराज हो सकते हैं पर माँ नाराज नहीं हो सकती। ममता की छांव देती, परिवार को सम्मान देती, माँ करुणा, मानवता एवं निस्वार्थ भाव की मूर्ति हैं। जीवन का आधार माँ संवेदना की मूर्ति संवेदन हैं विश्व की।
सत्य यही है,
माँ नहीं किस्सा, माँ नहीं कहानी माँ की गोद में पलती है जिंदगानी।


Spread the love

About Budaun Amarprabhat

Check Also

विश्व पर्यावरण दिवस पर दबतोरी चौकी परिसर में किया गया वृक्षारोपण

Spread the loveदबतोरी -विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दबतोरी चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार के …

error: Content is protected !!