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सैनिकों को शहीद का दर्जा और पुरानी पेंशन दे सरकार: धर्मेंद्र यादव

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सपा सांसद ने संसद में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बिल 2026 का किया पुरजोर विरोध

नई दिल्ली/लखनऊ।  समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, मुख्य सचेतक और सांसद धर्मेंद्र यादव ने संसद में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) 2026’ बिल का कड़ा विरोध किया है। देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले जवानों को नमन करते हुए उन्होंने भाजपा सरकार को सैनिकों के प्रति ‘असंवेदनशील’ करार दिया।

परिवार में भी रहे सैनिक, अच्छी तरह समझता हूं दर्द

सदन को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र यादव ने कहा, “नेताजी (मुलायम सिंह यादव) देश के रक्षा मंत्री रहे और हमारे परिवार से भी कई लोग सेना में रहे हैं। एक किसान परिवार से होने के नाते हम सैनिकों के दर्द और उनकी परेशानियों को गहराई से समझते हैं।” उन्होंने गृह मंत्री के नक्सलवाद खत्म होने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर नक्सलवाद खत्म हुआ है, तो इसमें हजारों वीर जवानों का बलिदान है। यह सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह उनके परिजनों के लिए ऐसी नीतियां लाती जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी पाते।

शहीद के दर्जे पर सरकार की घेराबंदी

सांसद ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि उच्च और उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों के बावजूद केंद्र सरकार जवानों को ‘शहीद’ का दर्जा देने का विरोध कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के साढे़ अठारह लाख करोड़ रुपये तो माफ कर सकती है, लेकिन जब बात जवानों की पेंशन की आती है, तो फंड की कमी का बहाना बनाया जाता है।

अग्निवीर और पेंशन पर तीखे प्रहार

धर्मेंद्र यादव ने नेताजी के कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने सैनिकों के पार्थिव शरीर को ससम्मान घर पहुंचाने की व्यवस्था की थी। इसके उलट, वर्तमान भाजपा सरकार ने ‘अग्निवीर’ जैसी अस्थाई नौकरी की योजना लागू कर दी है ताकि जवानों को पेंशन न देनी पड़े।

सपा की प्रमुख मांगें:

धर्मेंद्र यादव ने समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से बिल का विरोध करते हुए निम्नलिखित मांगें रखीं:

  • ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले हर जवान को ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाए।

  • केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) बहाल की जाए।

  • इस बिल को सर्वदलीय बैठक में भेजा जाए ताकि व्यापक चर्चा के बाद जवानों के साथ न्याय हो सके।

उन्होंने पुलवामा और दंतेवाड़ा जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार से पूछा कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के शहीद हुए हजारों जवानों के परिवारों के लिए सरकार ने अब तक ठोस क्या किया है?


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