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परीक्षित मोक्ष के साथ थमा कथा का प्रवाह, भक्ति में डूबा पूरा शहर

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सात दिवसीय भागवत कथा का समापन, ब्राह्मण भोज व भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

संवाददाता: गोविंद देवल

शहर। विरुआवाड़ी मंदिर स्थित गीता भवन में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन परीक्षित मोक्ष प्रसंग के साथ भावपूर्ण वातावरण में हो गया। अंतिम दिन कथा स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कथा व्यास आचार्य त्रिलोक कृष्ण मुरारी जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कोई साधारण धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि ब्रह्म संहिता है, जिसमें भगवान की दिव्य लीलाओं का विस्तृत वर्णन है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण मात्र ही जीव के उद्धार का मार्ग प्रशस्त करता है। साथ ही उन्होंने ईमानदारी से अर्जित धन को ही फलदायी बताते हुए बेईमानी से कमाए धन से बचने का संदेश दिया।
कथा के दौरान भगवान के विवाह प्रसंग, राजा नृग, जरासंध उद्धार, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथाओं का विस्तार से वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
समापन अवसर पर आयोजित यज्ञ में यजमानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां दीं। पूर्णाहुति के बाद ब्राह्मण भोज का आयोजन किया गया। इसके पश्चात शुरू हुए विशाल भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम में मुख्य यजमान के रूप में अर्जुन लाल गुप्ता उपस्थित रहे। व्यवस्थाओं में मुनीश अग्रवाल, अक्षत अग्रवाल, अमित रस्तोगी, कैलासी सुनील सपड़ा, मनोज रस्तोगी और सुनील गुप्ता सहित कई लोगों का विशेष सहयोग रहा।
पूजन कार्य पंडित उमाशंकर मिश्र ने संपन्न कराया, जबकि कार्यक्रम का संचालन कामेश पाठक ने किया। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर इस आयोजन का समापन धार्मिक उल्लास के साथ


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