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अहंकार छोड़ो, विनम्रता अपनाओ: तृप्ति आर्य का संदेश, गुधनी सत्संग में गूंजे भजन

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संवाददाता: गोविंद देवल, बिल्सी

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। यज्ञ के बाद आयोजित सत्संग में वैदिक विदुषी आचार्य तृप्ति आर्य ने विनम्रता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
उन्होंने कहा कि धनवान को धन का, बलवान को बल का, रूपवान को रूप का और विद्वान को अपनी विद्या का अहंकार हो जाता है, लेकिन जो व्यक्ति इन सब से ऊपर उठकर विनम्र बनता है, वही समाज में सम्मान और पूज्यता प्राप्त करता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रावण चारों वेदों का ज्ञाता था, लेकिन अहंकार के कारण वह सच्चा विद्वान नहीं बन सका, जबकि भगवान राम सीमित ज्ञान के बावजूद विनम्रता के कारण श्रेष्ठ माने गए।
सत्संग के दौरान आर्य संस्कारशाला के बच्चों ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में श्रीमती सूरजवती देवी, विचित्रपाल सिंह, राकेश आर्य, श्रीमती गुड्डो देवी, दुष्यंत सिंह और श्रीमती कमलेश कुमारी सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सत्संग के अंत में सभी ने यज्ञ में आहुति देकर समाज में सद्भाव, संस्कार और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।


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