माँ तुझे प्रणाम!!
मातृ दिवस पर विशेष
लेखिका : श्रीमती हरवंश डांगे
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य
मातृ दिवस मां के अपार प्रेम, ममता, त्याग और समर्पण को सम्मान देने का अवसर है। मां वह शक्ति है, जो असहनीय पीड़ा सहकर बच्चे को जन्म देती है और अपना सर्वस्व न्योछावर कर उसके जीवन को संवारती है। मां वात्सल्य की प्रतिमूर्ति है, जो बिना किसी स्वार्थ के अपने बच्चों के लिए हर खुशी कुर्बान कर देती है।
जब बच्चा बीमार होता है तो मां अपनी रातों की नींद त्यागकर उसके सिरहाने बैठी रहती है। मां एक ऐसा शब्द है, जो दिल को सुकून देता है। उसकी मुस्कान, प्यार और लोरी बच्चे के हर दुख को दूर कर देती है। सच ही कहा गया है—
“मांगने पर जहां सारी मन्नत पूरी होती है,
मां के पैरों में ही तो जन्नत होती है।”
मां जीवन की पहली गुरु, सबसे अच्छी मित्र और सबसे बड़ी रक्षक होती है। वह पूरे परिवार की नींव और समाज की रीढ़ होती है। सुबह सबसे पहले उठकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाना, बच्चों की देखभाल, बुजुर्गों की सेवा और आज के दौर में नौकरी के साथ घर संभालना— मां हर भूमिका को पूरी निष्ठा से निभाती है।
लेकिन क्या कभी बच्चों ने मां के चेहरे की थकान और उदासी को समझने की कोशिश की? क्या कभी पूछा कि मां ने खाना खाया या नहीं? अक्सर मां अपने बच्चों और परिवार के लिए अपनी इच्छाओं और स्वास्थ्य तक को नजरअंदाज कर देती है।
इसलिए सभी सम्माननीय माताओं से यही कहना है कि “Health is Wealth”। अपने पुराने शौक और रुचियों को कभी न छोड़ें। बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां दें, ताकि वे आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बन सकें। बच्चों के साथ समय बिताएं और उन्हें अपने कार्यों में सहभागी बनाएं, जिससे वे भविष्य में अच्छे इंसान बनने के साथ मां के भावनात्मक महत्व को भी समझ सकें।
“उम्र बढ़ने की बजाय घट जाती तो क्या बात थी,
जिंदगी मां की गोद में कट जाती तो क्या बात थी।”
सरकार द्वारा भी माताओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मातृत्व अवकाश को 26 सप्ताह तक बढ़ाया गया है तथा मातृ वंदना योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने भी कहा है कि—
“हर मां में नेतृत्व और मातृत्व दोनों विशेषताएं होती हैं। नेतृत्व मां की सहृदय प्रवृत्ति का ही विस्तार है।”
मां वह है, जो हर किसी का स्थान ले सकती है, लेकिन मां का स्थान कोई नहीं ले सकता। मां जन्मदात्री है, पालनहार है, सहनशीलता और त्याग की प्रतिमूर्ति है। यदि संसार में मां न होती, तो मानव जीवन की कल्पना भी संभव नहीं थी।
महर्षि Valmiki द्वारा कही गई यह पंक्ति आज भी मां के महत्व को सर्वोच्च स्थान देती है—
“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।”
“माँ शक्ति है, माँ काशी है,
माँ कवच है, माँ चारों धाम है।
माँ चिंता है, माँ याद है,
माँ जिंदगी का सार है।”
Budaun Amarprabhat