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अफगानिस्तान में नवाब काज़िम अली खां का शानदार इस्तक़बाल

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काबुल रवानगी से पहले भारत में अफगानिस्तान के कार्यवाहक राजदूत नूर अहमद नूर से मिले नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां
काबुल स्थित भारतीय दूतावास में कार्यवाहक राजदूत करण यादव से भी मिले नवेद मियां
अहम शख़्सियत अब्दुल मजीद, फाज़िल महमूद सफी और डॉ लुत्फुर्रहमान आफताब द्वारा नवेद मियां के सम्मान में कार्यक्रम
बाबर के मकबरे पर पहुंचकर रज़ा लाइब्रेरी में मौजूद दीवान-ए-बाबर के बारे में बताया

राहुल मौर्य
रामपुर। लगभग 321 साल पहले 1704 में रामपुर आए अपने यूसुफ़ज़ई पख्तून पूर्वजों की धरती अफगानिस्तान पहुंचे नवाब काज़िम अली खां उर्फ नवेद मियां का काबुल में शानदार इस्तक़बाल हुआ। नवेद मियां 174 सालों तक रामपुर रियसात के शासक रहे नवाबों के एक मात्र वंशज हैं, जिन्होंने अफगानिस्तान जाकर अपने पूर्वजों के खानदानों के लोगों से मुलाक़ात की है।
काबुल रवानगी से पहले पूर्व मंत्री नवाब काज़िम अली खां उर्फ नवेद मियां ने भारत में अफगानिस्तान के कार्यवाहक राजदूत नूर अहमद नूर से नई दिल्ली स्थित दूतावास में मुलाक़ात की थी। राजनयिक ने उनका स्वागत ज़ाफरान भेंट करके किया और रामपुर में अफगानी पठानों के बारे में मालूमत हासिल कर हैरानी ज़ाहिर की।


नवेद मियां अफगानिस्तान पहुंचने पर काबुल में स्थित भारतीय दूतावास भी पहुंचे, जहां कार्यवाक राजदूत करण यादव ने उनका स्वागत किया। दोनों के बीच भारत और अफगानिस्तान के संबंधों पर बातचीत हुई।
नवेद मियां काबुल के लोकप्रिय पर्यटन स्थल बाग-ए-बाबर भी गए। यह मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का मकबरा है। उन्होंने मकबरे के इंचार्ज ज़बी उल्लाह साबित से मुलाक़ात कर रामपुर रज़ा लाइब्रेरी में मौजूद एक बेहद महत्वपूर्ण पाण्डुलिपि पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि रज़ा पुस्तकालय में मौजूद एक अनूठी पांडुलिपि दीवान-ए-बाबर है। तुर्की भाषा में लिखी गई इस कृति के कुछ अंश बाबर की हस्तलिपि में हैं। इसमें स्वयं सम्राट शाहजहाँ की एक टिप्पणी है, जो बाबर की हस्तलिपि की पुष्टि करती है।


नवेद मियां ने बताया कि दक्षिण-मध्य अफ़ग़ानिस्तान के प्रमुख ऐतिहासिक और व्यावसायिक शहर है कंधार के व्यवसायी अब्दुल मजीद, फाज़िल महमूद सफी और काबुल के शिक्षा मंत्रालय से संबंधित डॉ लुत्फुर्रहमान आफताब की ओर से उनका शानदार स्वागत किया गया। सभी की मेहमाननवाज़ी बेमिसाल थी, जो हमेशा याद रहेगी।


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