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नाज हॉस्पिटल में किशोरी के प्रसव की सूचना से मचा हड़कंप, पुलिस ने मां-बेटी को लिया हिरासत में, अस्पताल सील

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राहुल मौर्य
स्वार (रामपुर)। नगर स्थित नाज हॉस्पिटल में एक अविवाहित किशोरी के प्रसव कराने की सूचना मिलने पर शुक्रवार को हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस किशोरी और उसकी मां को अपने साथ कोतवाली ले गई, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने हॉस्पिटल को सील कर दिया। पूरे मामले में मेडिकल परीक्षण और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जानकारी के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी की मां उसे लेकर नगर स्थित नाज हॉस्पिटल पहुंची थी। इसी दौरान शुक्रवार कोकिसी शिकायतकर्ता ने पुलिस को सूचना दी कि अस्पताल में किशोरी का गर्भपात कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही डायल 112पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई।
उधर सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. देवेश चौधरी भी टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। बताया गया कि जब टीम हॉस्पिटल पहुंची तो वहां कोई स्टाफ मौजूद नहीं मिला और अस्पताल के गेट बंद थे। मामले को संदिग्ध मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हॉस्पिटल को सील कर दिया।
पुलिस ने किशोरी और उसकी मां को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं हॉस्पिटल संचालिका को भी कोतवाली बुलाया गया। संचालिका का कहना है कि किशोरी को केवल बुखार की दवा दी गई थी और प्रसव अथवा गर्भपात जैसी कोई कार्रवाई अस्पताल में नहीं हुई है।
पुलिस अब किशोरी को मेडिकल परीक्षण और अल्ट्रासाउंड के लिए जिला चिकित्सालय भेजने की तैयारी कर रही है। मामले को लेकर नगर में तरह-तरह की चर्चाएं बनी हुई हैं, जबकि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूरे प्रकरण की जांच में जुटे हुए हैं। कोतवाल अनुपम शर्मा का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किशोरी गर्भवती थी या नहीं और अस्पताल में वास्तव में क्या हुआ था।


सील होने के आधे घंटे बाद ही खुल गया नाज हॉस्पिटल, पंजीकरण धारक डॉक्टर ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

स्वार। नगर स्थित नाज हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किए जाने के बाद नया मोड़ सामने आया है। बताया जा रहा है कि हॉस्पिटल को सील करने के करीब आधे घंटे बाद ही सील तोड़कर दोबारा संचालन शुरू कर दिया गया। मामले को लेकर नगर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। मौके पर अस्पताल बंद मिला था और कोई स्टाफ भी मौजूद नहीं था।
इसी बीच हॉस्पिटल के पंजीकरण धारक डॉ. ईश्वर प्रसाद सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि नाज हॉस्पिटल उनके नाम से पंजीकृत है और वह उस समय नगर के ही दूसरे हॉस्पिटल में गए हुए थे। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को पहले नोटिस जारी करना चाहिए था। बिना नोटिस सीधे हॉस्पिटल सील करना उचित नहीं था। डॉ. ईश्वर प्रसाद ने यह भी कहा कि हॉस्पिटल को सील करने का कोई औचित्य नहीं था। वहीं दूसरी ओर सील तोड़कर अस्पताल का संचालन दोबारा शुरू किए जाने की चर्चा से स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे है
नोडल अधिकारी डां देवेश चौधरी ने बताया कि नाज हॉस्पिटल को सील किया गया था। अगर सील तोड़कर संचालन किया गया है तो वह अपराध की श्रेणी में आता है। नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।


दूसरे जिलों और उत्तराखंड के डॉक्टरों के नाम पर चल रहे नर्सिंगहोम, स्टाफ नर्स के भरोसे मरीजों का इलाज

स्वार। नगर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निजी नर्सिंगहोमों की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। आरोप है कि अधिकांश प्राइवेट नर्सिंगहोम दूसरे जिलों और यहां तक कि उत्तराखंड के चिकित्सकों के नाम से पंजीकृत कराए गए हैं, जबकि मौके पर डिग्रीधारी डॉक्टर कभी मौजूद ही नहीं रहते।
जानकारी के अनुसार नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दर्जनों निजी अस्पताल एवं नर्सिंगहोम संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों का पंजीकरण तो विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम पर कराया गया है, लेकिन वास्तविकता में वहां मरीजों का उपचार स्टाफ नर्स और झोलाछापों के भरोसे किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई नर्सिंगहोमों में गंभीर मरीजों का इलाज, प्रसव और अन्य चिकित्सीय प्रक्रियाएं बिना योग्य डॉक्टर की मौजूदगी के की जाती हैं। इससे मरीजों की जान को खतरा बना रहता है। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते यह खेल लंबे समय से चल रहा है।
सूत्रों की मानें तो कई अस्पतालों में पंजीकरण कराने वाले चिकित्सक दूसरे शहरों अथवा उत्तराखंड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और स्वार क्षेत्र के अस्पतालों में कभी-कभार ही दिखाई देते हैं। इसके बावजूद अस्पतालों का संचालन लगातार जारी है। क्षेत्रीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से ऐसे नर्सिंगहोमों की जांच कर कार्रवाई की मांग की है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।


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