उत्तर प्रदेश सूचना आयोग की बड़ी कार्रवाई, कानपुर जोन के तत्कालीन जनसूचना अधिकारी के वेतन से वसूली जाएगी जुर्माना राशि
लखनऊ/कानपुर। उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत मांगी गई जानकारी को समय से न देने और लापरवाही बरतने के एक मामले में कड़ा रुख अपनाया है। माननीय राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने मामले की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (कानपुर जोन) के तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/सम्पत्ति प्रबन्धक आनन्द कुमार पर 25,000 रुपये का अधिकतम जुर्माना अधिरोपित किया है। आयोग ने इस जुर्माना राशि को संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूलने के आदेश जारी किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता अर्चना शर्मा ने 9 मई 2023 को एक आरटीआई आवेदन के माध्यम से संयुक्त आवास आयुक्त, आवास एवं विकास परिषद (कानपुर जोन) के कार्यालय से स्पीड पोस्ट के जरिए कुछ प्रपत्रों और डाक प्राप्ति के बाद की गई समसामयिक कार्रवाई की स्थिति की सूचना मांगी थी। जनसूचना अधिकारी ने स्वीकार किया कि उन्हें यह आवेदन 16 जून 2023 को प्राप्त हो गया था, लेकिन इसके बावजूद शिकायतकर्ता को निर्धारित समय-सीमा के भीतर कोई सूचना नहीं दी गई।
सूचना न मिलने से क्षुब्ध होकर शिकायतकर्ता ने आरटीआई एक्ट की धारा-18 के तहत राज्य सूचना आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।
2 वर्ष 7 महीने की देरी और ‘व्यस्तता’ का बहाना खारिज
आयोग द्वारा बार-बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी जनसूचना अधिकारी की ओर से लंबे समय तक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। आखिरकार, दिसंबर 2025 में उनकी तरफ से पहली प्रतिक्रिया आई। आयोग ने पाया कि आवेदनकर्ता को सूचना करीब 02 वर्ष 07 माह के विलम्ब से दी गई।
आयोग द्वारा जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ के जवाब में अधिकारी द्वारा कार्य की ‘व्यस्तता’ और ‘मामला 19 वर्ष पुराना होने’ की दलीलें दी गईं। राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने इन तर्कों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि-
“अधिनियम के तहत मामला पुराना होने पर सूचना न दिए जाने का कोई आधार नहीं है। धारा-8(3) के अनुसार, 20 वर्ष पूर्व तक घटित हुई किसी भी घटना या विषय की सूचना आवेदक को उपलब्ध कराई जानी अनिवार्य है। कार्य की व्यस्तता के आधार पर इतनी लंबी देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता।”
वेतन से काटी जाएगी जुर्माने की रकम
आयोग ने सभी तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए जनसूचना अधिकारी आनन्द कुमार को धारा-20(1) के तहत दोषी पाया और उन पर 25,000 रुपये (पच्चीस हजार मात्र) का जुर्माना ठोक दिया। इस आदेश की एक प्रति रजिस्ट्रार (उ.प्र. सूचना आयोग) और एक प्रति जिलाधिकारी (कानपुर) को आवश्यक कार्रवाई व वेतन से वसूली सुनिश्चित करने हेतु प्रेषित की गई है।
Budaun Amarprabhat