नई दिल्ली, 22 सितंबर (अमर प्रभात ब्यूरो): देश में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को सुदृढ़ करते हुए सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी आरोपी को हिरासत में लेते समय उसकी गिरफ्तारी के ठोस कारण लिखित रूप में नहीं दिए जाते हैं, तो वह पूरी कार्रवाई पूर्णतः गैरकानूनी मानी जाएगी।न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 22(1) का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी को उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित कारण और कानूनी परामर्श का अधिकार देना अनिवार्य है। शीर्ष अदालत ने यह भी कड़ा निर्देश दिया है कि यदि किसी मामले में आरोपी को एक बार रिहा कर दिया जाता है, तो संबंधित जांच एजेंसी मजिस्ट्रेट की पूर्व लिखित अनुमति के बिना उसे दोबारा सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती है। इस फैसले से पुलिस व अन्य एजेंसियों की मनमानी पर लगाम लगेगी
Budaun Amarprabhat