*स्त्रियों की आदर्श थीं देवी प्रज्ञा आर्य : आचार्य संजीव रूप*
बिल्सी . तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित आर्य समाज की समर्पित कार्यकर्त्री, समाजसेविका, मधुर गायिका एवं बहुमुखी प्रतिभा की धनी देवी प्रज्ञा आर्य की पाँचवीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को उनके परिजनों एवं शुभचिंतकों द्वारा सामूहिक यज्ञ का आयोजन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
यज्ञ के माध्यम से दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिवार को शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई। यज्ञ के उपरांत उपस्थित लोगों ने प्रज्ञा आर्य के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी स्मृतियों को नमन किया।
इस अवसर पर उनके जीवनसाथी अंतर्राष्ट्रीय वेद कथाकार एवं समाज सुधारक आचार्य संजीव रूप ने भावुक होकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि “समय बीत जाता है, लेकिन सच्चे जीवनसाथी की स्मृतियाँ कभी नहीं जातीं। प्रज्ञा जी की कमी आज भी महसूस होती है और उनके प्रेम, समर्पण एवं सेवाभाव की स्मृतियाँ सदैव हमारे साथ रहेंगी।”
पुत्र प्रश्रय आर्य पुत्री आचार्य तृप्ति आर्य ने भी अपनी माता को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उपस्थित अन्य परिजनों, आर्य समाज के कार्यकर्ताओं एवं शुभचिंतकों ने भी प्रज्ञा आर्य को श्रद्धांजलि दी।
उल्लेखनीय है कि प्रज्ञा आर्य ने अपने जीवन में आर्य समाज एवं सामाजिक कार्यों में सक्रिय योगदान दिया। वे एक कुशल गायिका, कलाकार, समाजसेविका तथा संस्कारवान गृहिणी के रूप में भी जानी जाती थीं। उनके सरल, सहज एवं सेवाभावी व्यक्तित्व को स्मरण करते हुए उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।
चार वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी स्मृतियाँ परिवार और समाज के बीच उसी आत्मीयता के साथ जीवंत हैं।यज्ञ में श्रीमती संतोष कुमारी , कुमारी तान्या आर्य , कु अंशिका , कु अनन्या , श्रीमती पूजा आर्य , नीरेश आर्य , सुखबीर सिंह , राकेश आर्यआदि मौजूद रहे
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