बदायूं। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं को सुरक्षा और विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
बुधवार को नेकपुर स्थित श्री मोहन सिंह मेमोरियल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित इस जागरूकता शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में अपर जनपद न्यायाधीश विकास सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी।
अपर जनपद न्यायाधीश विकास सिंह ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति बच्चा है, जिसे लैंगिक अपराधों से पूर्ण कानूनी संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट में नाबालिग की कथित सहमति किसी लैंगिक कृत्य को वैध नहीं ठहराती। बच्चों को सुरक्षित व असुरक्षित स्पर्श का अंतर समझाते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय व्यवहार पर चुप रहने के बजाय तुरंत परिजनों, शिक्षकों या किसी जिम्मेदार वयस्क को सूचित करें।
न्यायाधीश ने डिजिटल सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए बच्चों को अनजान लोगों से व्यक्तिगत तस्वीरें, वीडियो या पासवर्ड साझा न करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने यह भी संदेश दिया कि किसी अप्रिय घटना में बच्चे की कोई गलती नहीं होती; ऐसे समय में बच्चे पर विश्वास कर उसकी मदद करना समाज का कर्तव्य है।
कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधक, प्रधानाचार्य, शिक्षकगण व बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव अंकित रस्तोगी ने बताया कि आमजन और बच्चों को जागरूक करने के लिए ऐसे विधिक शिविर जिले में निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं।
Budaun Amarprabhat