लखनऊ। शरद पूर्णिमा के अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिर्विज्ञान विभाग स्थित पंडित कल्याण दत्त शर्मा वेधशाला में खगोलीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश अमेचर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब (UPAAC) और इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भारतीय पारंपरिक वेधयंत्रों और आधुनिक दूरबीनों के माध्यम से खगोलीय पिंडों के अध्ययन का अवसर मिला।
कार्यक्रम में आधुनिक सौर दूरबीनों से सूर्य के सौर कलंक, प्रोमिनेंस और अन्य विशेषताओं का अवलोकन कराया गया। रात्रिकालीन आकाश दर्शन में प्रतिभागियों ने दूरबीनों से शरद पूर्णिमा का चंद्रमा और शनि ग्रह देखा।
ज्योतिर्विज्ञान विभाग के डॉ. बिपिन शास्त्री ने सम्राट-पलभा यंत्र, याम्योत्तर तुरिय, भित्तीय यंत्र और शंकु यंत्र की कार्यप्रणाली समझाई। वहीं, संकल्प मोहन ने खगोल विज्ञान और निहारिकाओं की खोज से जुड़े अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों के लिए खगोलीय क्विज भी आयोजित की गई।
कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला की तकनीकी टीम तथा स्नातक और परास्नातक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में खगोल विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना और भारतीय खगोलीय ज्ञानपरंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ना रहा।
Budaun Amarprabhat