संवाददाता : गोविंद देवल
लखनऊ। लखनऊ नगर निगम के इतिहास में रविवार को एक ऐसा सदन देखने को मिला, जो महज 45 मिनट में खत्म हो गया। इसी दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का ₹5179.71 करोड़ का बजट भी बिना किसी चर्चा के पास कर दिया गया, जिस पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई है।
बताया जा रहा है कि बजट प्रस्तुति में सिर्फ 30 मिनट का समय लगा और उपसभापति द्वारा पढ़कर सीधे पारित करा दिया गया। न तो पार्षदों को चर्चा का अवसर मिला और न ही किसी संशोधन पर विचार किया गया, जिसे विपक्ष ने लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।
बजट की मुख्य बातें
नगर निगम के इस बजट में शहर की सफाई, कूड़ा निस्तारण और बुनियादी विकास कार्यों पर विशेष जोर दिया गया है।
₹4692.71 करोड़ विकास कार्यों पर खर्च होंगे
₹487 करोड़ जलकल और सीवर व्यवस्था पर
₹400 करोड़ से अधिक कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता पर
सड़क निर्माण के लिए ₹271 करोड़ का प्रावधान
हाउस टैक्स में कोई बढ़ोतरी नहीं, समय पर जमा करने पर छूट
श्मशान घाटों के सौंदर्यीकरण और नई उत्सव वाटिकाओं का निर्माण
नगर निगम को डिजिटल बनाने पर जोर
नगर निगम ने ₹750 करोड़ हाउस टैक्स संग्रह का लक्ष्य रखा है, जबकि मेयर विकास निधि ₹20 करोड़ और नगर आयुक्त निधि ₹10 करोड़ निर्धारित की गई है। पार्षदों की वार्ड विकास निधि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
राजस्व का लेखा-जोखा
बजट में ₹2278 करोड़ राजस्व खाते से आय का अनुमान है, जिसमें प्रॉपर्टी टैक्स, लीज रेंट और जुर्माने शामिल हैं। वहीं ₹981 करोड़ कैपिटल खाते में राज्य वित्त आयोग, अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन समेत केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से मिलने वाली राशि शामिल है।
विपक्ष का हमला
विपक्ष ने बजट को जनविरोधी बताते हुए कहा कि बिना चर्चा के इसे पास करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका आरोप है कि गृहकर ऑफलाइन जमा करने पर मिलने वाली छूट में कटौती की गई है, जिसे यथावत रखा जाना चाहिए था। साथ ही विकास कार्यों में पर्याप्त बढ़ोतरी न करने को जनता के साथ धोखा बताया गया।
विपक्ष ने यह भी कहा कि नगर निगम में सत्तारूढ़ दल के बहुमत के कारण अहंकार में स्वस्थ चर्चा नहीं होने दी गई, जिससे सदन की मर्यादा प्रभावित हुई है।
Budaun Amarprabhat