ट्रेंच विधि, ड्रिप सिंचाई और जैविक खेती से बढ़ाया उत्पादन, किसानों के लिए बने प्रेरणा
संवाददाता : गोविंद देवल
बदायूं। विकासखंड उझानी क्षेत्र के ग्राम गठौना निवासी कृषक प्रदीप सिंह आधुनिक तकनीकों के माध्यम से गन्ना खेती में सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। वैज्ञानिक पद्धति, जल संरक्षण और जैविक खेती को अपनाकर उन्होंने यह साबित किया है कि खेती को आधुनिक सोच और तकनीक से जोड़ा जाए तो यह लाभकारी व्यवसाय बन सकती है।
एमएससी एग्रीकल्चर की शिक्षा प्राप्त करने वाले प्रदीप सिंह ने नौकरी की बजाय खेती को अपना कार्यक्षेत्र चुना। उन्होंने पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और घटते लाभ को देखते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि खेती में ज्ञान सबसे बड़ी पूंजी है और विज्ञान को खेती से जोड़कर किसान आत्मनिर्भर बन सकता है।
प्रदीप सिंह ने गन्ना खेती में ट्रेंच विधि को अपनाया, जिसमें गहरी नालियां बनाकर गन्ने की बुवाई की जाती है। इस तकनीक से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। साथ ही खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित कर उन्होंने पानी की खपत में काफी कमी लाई। इस तकनीक से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है और फसल को पर्याप्त नमी मिलती है।
उन्होंने सह-फसली खेती को भी बढ़ावा दिया है। गन्ने की कतारों के बीच आलू, सरसों, धनिया, मटर और सौंफ जैसी फसलें उगाकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा रही है। इसके अलावा जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए जीवामृत, घनजीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग किया जा रहा है। नीम आधारित जैविक उत्पादों के प्रयोग से खेती की लागत कम होने के साथ फसल की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
शुरुआती दौर में लोगों ने उनकी तकनीकों पर संदेह जताया, लेकिन बेहतर परिणाम आने के बाद अब क्षेत्र के किसान भी उनसे प्रेरणा ले रहे हैं। जहां सामान्य तौर पर एक एकड़ में 250 से 300 क्विंटल गन्ना उत्पादन होता था, वहीं प्रदीप सिंह ने 500 से 600 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन हासिल किया।
आज प्रदीप सिंह क्षेत्र के किसानों और युवाओं को आधुनिक खेती, जैविक कृषि और जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि वैज्ञानिक सोच और पारंपरिक अनुभव का सही समन्वय किया जाए तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
Budaun Amarprabhat