लखनऊ/अमरोहा। आधुनिक जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच निःसंतानता की समस्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में आई प्रगति ने इसके समाधान की नई राहें खोल दी हैं। एनसीआर की एक प्रसिद्ध आईवीएफ विशेषज्ञ ने कहा कि आईवीएफ तकनीक आज ऐसे दंपत्तियों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जो प्राकृतिक रूप से माता-पिता नहीं बन पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भागदौड़ भरी जिंदगी, मानसिक तनाव, देर से विवाह और खान-पान में बदलाव निःसंतानता के प्रमुख कारण हैं। यह केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक चुनौती भी है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के जरिए अब इसका प्रभावी इलाज संभव हो चुका है।
विशेषज्ञ के अनुसार, आईवीएफ तकनीक को आम बोलचाल में ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ भी कहा जाता है, जो पूरी तरह वैज्ञानिक और सुरक्षित प्रक्रिया है। इसके बावजूद समाज में इसे लेकर कई भ्रांतियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लोग अक्सर इसे अप्राकृतिक मानते हैं, जबकि यह चिकित्सा विज्ञान की उन्नत तकनीक है, जो हजारों परिवारों के जीवन में खुशियां ला चुकी है। निःसंतानता को अभिशाप नहीं, बल्कि एक चिकित्सीय स्थिति समझने की जरूरत है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि संकोच छोड़कर सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना ही समाधान की पहली सीढ़ी है। सही जानकारी और जागरूकता से ही इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है।
Budaun Amarprabhat