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स्वर्णिम भारत @2047” का भव्य लोकार्पण: शिक्षा जगत के दिग्गजों ने रखा विकसित भारत का विजन

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40 से अधिक शिक्षाविदों के विचारों से सजी पुस्तक; आत्मनिर्भर और समावेशी भारत की रूपरेखा पर मंथन

संवाददाता: गोविंद देवल

बदायूं। महाविद्यालय परिसर में शनिवार को बहुप्रतीक्षित पुस्तक “स्वर्णिम काल @2047 : आत्मनिर्भर, समावेशी और विकसित भारत की परिकल्पना” का भव्य लोकार्पण समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) आशीष कुमार सक्सेना ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. मोहन लाल मौर्य एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में राजकीय महाविद्यालय बदायूं की प्राचार्या डॉ. श्रद्धा गुप्ता मौजूद रहीं। इस अवसर पर प्रो. शिवराज कुमार की पुस्तक “Learning Assessment” का भी लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने पुस्तक की विषय-वस्तु, उद्देश्य और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कृति वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह न केवल शिक्षाविदों, बल्कि नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगी।
इस संपादित पुस्तक में देशभर के 40 से अधिक शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने अपने मौलिक विचार प्रस्तुत किए हैं। पुस्तक में शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, व्यापार, उद्योग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कृषि और सतत विकास जैसे अहम विषयों को समाहित किया गया है, जो भारत के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण बौद्धिक प्रयास है।
पुस्तक का संपादन प्रो. (डॉ.) आशीष कुमार सक्सेना, डॉ. आशीष कुमार गुप्ता एवं डॉ. जीवन कुमार सारस्वत द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। संपादकों ने बताया कि इस पुस्तक का उद्देश्य सकारात्मक विमर्श को आगे बढ़ाना और विकसित भारत के निर्माण के लिए ठोस दिशा प्रदान करना है।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं प्राध्यापकों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इनमें प्रो. बैकुंठ नाथ शुक्ला, डॉ. कमल सिंह, डॉ. संतोष कुमार सिंह, प्रो. शिवराज कुमार, डॉ. विक्रांत उपाध्याय, डॉ. रवि भूषण, डॉ. सत्यम मिश्रा, प्रो. नंद गोपाल मिश्रा एवं डॉ. एम.एम. फरशोरी प्रमुख रहे।
इसके अलावा डॉ. शैलेन्द्र प्रताप सिंह “कवीर जी”, डॉ. लक्ष्य सिंह चौधरी, डॉ. संदीप नायक, डॉ. मुन्ना वरुण, अनमोल निधि, डॉ. सूरज कुमार, डॉ. नीतू गुप्ता, डॉ. राम प्रसाद वर्मा, डॉ. निहारिका रस्तोगी, डॉ. आकाश कुमार, डॉ. गौरव रस्तोगी सहित अन्य विद्वानों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और गरिमामय बना दिया। गिंदो देवी महाविद्यालय से डॉ. शुभा भसीन एवं शालू गुप्ता भी विशेष रूप से मौजूद रहीं।
कार्यक्रम का संचालन एम.ए. राजनीति शास्त्र की छात्रा ऐश्वर्या भारद्वाज ने प्रभावी ढंग से किया। अंत में डॉ. संजीव कुमार सक्सेना ने धन्यवाद ज्ञापन कर सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. (डॉ.) आशीष कुमार सक्सेना ने कहा कि ऐसे बौद्धिक प्रयास राष्ट्र निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होते हैं और यह पुस्तक समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में अहम भूमिका निभाएगी।


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