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संस्कारों से सशक्त युवा ही बनाएंगे भारत को विश्वगुरु’—विद्या भारती संगोष्ठी में गूंजा राष्ट्र निर्माण का मंत्र

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प्रदेश संगठन मंत्री हरिशंकर बोले—प्रधानाचार्य ही शिक्षा व्यवस्था की धुरी, संस्कृति व समरसता पर दिया जोर

संवाददाता: गोविंद देवल

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विद्या भारती के प्रदेश संगठन मंत्री हरिशंकर ने कहा कि विद्या भारती की रीति-नीति, परंपराओं और योजनाओं का केंद्र बिंदु प्रधानाचार्य होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्था का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और संस्कारों से युक्त ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है, जो समाज में सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाए।
उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन के माध्यम से नगरों और गांवों में सज्जन शक्ति का जागरण कर भारत माता को विश्वगुरु के उच्चासन पर स्थापित करना ही विद्या भारती का लक्ष्य है।
विभिन्न सत्रों में यशवीर सिंह, होडिल सिंह, महेंद्र सिंह, मंजरी सिंह, अंकुर अग्रवाल, दयाल शर्मा, रामकिशोर श्रीवास्तव, रविकांत चावला, सुनील कुमार सिंह, राजहंस शर्मा, सुनील कुमार सिंह पुंडीर और सुरेंद्र कुमार गोला ने अपने-अपने विषयों पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन सुरेंद्र कुमार गोला ने किया, जबकि अतिथि परिचय ओमकार गंगवार द्वारा कराया गया।
इस अवसर पर शिशु शिक्षा समिति ब्रज प्रदेश के अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता, ओमप्रकाश वैश्य, अमृतपाल सिंह, निदेशक कालिका प्रसाद गंगवार, प्रभारी प्रधानाचार्य कमलेश कुमार गोला, प्रचार प्रमुख राजकुमार सिंह सेंगर सहित ब्रज प्रांत के समस्त प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।


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