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*डर नहीं लगता है मुझको तीर और तलवार से* *डर रहा हूँ आदमी के दोगले व्यवहार से*

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बिल्सी , निकटवर्ती यज्ञ तीर्थ गुधनी में आर्य समाज के तत्वाधान में चल रहे यज्ञ महोत्सव 2026 का समापन शुभ संकल्पों के साथ हो गया । इस अवसर पर लगभग 10000 श्रद्धालुओं के लिए भंडारा कराया गया । वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप के निर्देशन में हुए यज्ञ महोत्सव में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कवि सम्मेलन हुआ जिसमें देश भर के अनेक कवि पधारे । इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वर्षा यादव पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव तथा पूर्व राज्य मंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल जिला अध्यक्ष भाजपा राजीव गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम आरंभ कराया सर्वप्रथम ईश वन्दना की गई जिसे आचार्य संजीव रूप ने किया ।
*दम्भ द्वेष पाखंड झूठ को छोड़े हम* ,
*सत्य अहिंसा से ही नाता जोड़ हम* ॥
तत्पश्चात गाजियाबाद से पधारे मिलन कुमार मिलन ने गीत पढ़ा
*मां की हंसी को देखकर बच्चे को उछल पड़े*
*देखा उदास माँ को तो आंसू निकल पड़े*
नोएडा से पधारे युवा कवि दीपक दीप को खूब तालियां मिलीं
‘*देश धर्म पर जान लुटाने वाला हो शेखर जैसा*
*विश्व पटल पर ध्वज फहराने वाला हो केशव जैसा*
*बच्चा बच्चा भारत का हो वीर शिवाजी के जैसा* ”
मध्य प्रदेश मुरैना से पधारे सॉड मुरैनवी ने हास्य व्यंग्य की रचनाएं पड़ी जो लोगों को खूब भाई
*एक बड़े नेता जी का एक छोटा कुत्ता मर गया*
*नेताजी के मोहल्ले तथा शहर में मातम कर गया*

बरेली से वीर रस के कवि कमलकांत तिवारी ने उपस्थित श्रोताओं में जोश भर दिया
“*कह दो भारत की संसद से और सियासत दारों से*
*जंग नहीं जीती जाती है जंग लगे हथियारों से* ।

बिल्सी के युवा कवि ओजस्वी जौहरी ने गीत पढ़ा
*डर नहीं लगता है मुझको तीर से तलवार से*
*डर रहा हूं आदमी के दोगले व्यवहार से*
संचालन कर रहेगा गाजियाबाद से पधारे डॉक्टर जयप्रकाश मिश्रा ने हास्य व्यंग के गीत कविताएँ सुनाकर श्रोताओं को गुदगुदाया
*बिन सूरज के घोर तिमिर में हमको राह दिखाता कौन*
*बिन धरती के जीव जगत का भारी भर उठाता कौन*
*हिंदू भी होता शायद .गर दयानंद नहीं होते*
*बीच भंवर से वेदों वाली कश्ती पार लगता कौन* ?
आचार्य संजीव रूप ने सबके मांग पर अपना एक शानदार गीत पढ़ा जो बहुत प्रेरणादाई था
*कभी हंसना कभी रोना पड़ेगा*
*जिंदगी है तो सब सहना पड़ेगा*
हाथरस से पधारे हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को लोटपोट होने को विवश कर दिया
*वह हिंदी के बल सारी दुनिया डोल लेता है*
*अंग्रेजी तो पउआ पीकर भी बोल लेता है*
*न जाने क्यों इतनी मिठास से अपनी भाषा में*
*क्या बोलने से पहले मिस्त्री घोल लेता है*
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गीतकार नरेंद्र गरल ने सुंदर गीत सुनाए जो सबको बहुत भाए
*सदाचार से जग जीता जा सकता है*
*बालक ध्रुव बन ईश्वर का सकता है*
*जिसे रत्न को पाने की बेचैनी है*
*वही ढूंढ कर कोहिनूर ला सकता है* ।
कवि सम्मेलन के समाप्त होते ही भारी बारिश हुई पंडाल पानी से भर गया ।सभी लोग ईश्वर का धन्यवाद कर रहे थे । यज्ञ के पश्चात बारिश होना यज्ञ के सफलता माना जाता है भगवान की प्रसन्नता माना जाता है ! इससे पूर्व मास्टर अगरपाल सिंह ‘ संजय सिंह ‘ बद्री प्रसाद आर्य ‘ सचिन आर्य विशेष आर्य ,प्रेमवीर आर्य ‘ महेंद्र पाल आर्य ,प्रमोद श्रीवास्तव , संजीव श्रीवास्तव , पिंकू श्रीवास्तव ,कृष्णपाल आर्य आनंद आर्य आदि ने कवियों का सम्मान किया । आचार्य संजीव रूप ने सभी को तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया । कार्यक्रम में महिपाल सिंह , लिटिल आर्य ‘ आचार्य आनंद पुरुषार्थी , नेमपाल, मोहित सिंह, श्रीमती शशि आर्य ,कुमारी तृप्ति आर्य ‘ज्योति रानी ,अमन उपाध्याय , आनंद आर्य ,अंशुल कुमार सिंह ,जयप्रकाश मिस्त्री , विश्वजीत पाल आदि मौजूद रहे


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