कानपुर देहात के 3 तत्कालीन एसडीएम पर 25 हजार का जुर्माना
लखनऊ। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत समय पर सूचना न देने और आदेशों की अवहेलना करने पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने बेहद कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने कानपुर देहात के सिकंदरा तहसील के तीन तत्कालीन उपजिलाधिकारियों (जनसूचना अधिकारियों) पर कुल 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने जुर्माने की यह धनराशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से काटकर जमा कराने का आदेश दिया है।
मामला अपीलार्थी सहदेव कुमार से जुड़ा है, जिन्होंने 5 मार्च 2024 को आरटीआई अधिनियम के तहत सिकंदरा तहसील में कार्यरत दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों (रामखिलावन व देशराज) की नियुक्ति, पदभार और स्थानांतरण से जुड़े 5 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। नियम के अनुसार 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने न तो सूचना दी और न ही आयोग के नोटिसों पर कोई जवाब दाखिल किया।
आयोग ने पाया कि इस अवधि में तैनात रहे अधिकारियों में से तत्कालीन एसडीएम प्रदुमन कुमार ने अपनी तैनाती के बाद 10 अप्रैल 2026 को सूचनाएं उपलब्ध करा दी थीं। हालांकि, उनसे पूर्व तैनात रहीं श्रीमती शिखा संखवार, श्याम नारायण शुक्ला और सुश्री शालिनी उत्तम ने सूचना उपलब्ध कराने में घोर लापरवाही बरती और कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी उपस्थित नहीं हुए।
आयोग ने इसे आरटीआई के मूल उद्देश्य को विफल करने वाला कृत्य मानते हुए धारा 20(1) के तहत श्रीमती शिखा संखवार पर 5,000 रुपये, श्री श्याम नारायण शुक्ला पर 10,000 रुपये और सुश्री शालिनी उत्तम पर 10,000 रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया है। प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक), उत्तर प्रदेश शासन को आदेश प्रेषित कर वेतन से जुर्माना वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
Budaun Amarprabhat