बदायूं। खगोल विज्ञान की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक लिरिड्स उल्का वर्षा एक बार फिर अप्रैल के महीने में आसमान को रोशन करने आ रही है। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार यह खगोलीय घटना 14 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक सक्रिय रहेगी, जबकि इसका चरम 22 अप्रैल की रात से 23 अप्रैल की भोर तक देखने को मिलेगा।
2700 साल पुरानी खगोलीय घटना
लिरिड्स उल्का वर्षा को दुनिया की सबसे प्राचीन उल्का वर्षाओं में गिना जाता है। इसके उल्लेख करीब 2700 वर्ष पुराने अभिलेखों में मिलते हैं। माना जाता है कि 687 ईसा पूर्व में चीन में लोगों ने इसे “बारिश की तरह गिरती उल्काओं” के रूप में देखा था।
यह उल्का वर्षा धूमकेतु C/1861 G1 थैचर के मलबे से बनती है, जो लगभग हर 415 वर्षों में सूर्य की परिक्रमा करता है।
कहां और कैसे देखें?
खगोलविदों के अनुसार यह नजारा उत्तरी गोलार्ध में सबसे बेहतर दिखाई देगा। आसमान में वेगा तारा और लायरा तारामंडल के आसपास से उल्काएं निकलती हुई प्रतीत होंगी।
देखने की दिशा: उत्तर-पूर्व
समय: रात 10 बजे के बाद, खासकर सुबह 3 बजे से भोर तक
औसतन: 10–20 उल्काएं प्रति घंटा (अंधेरे स्थानों में अधिक)
क्यों खास है यह नजारा?
लिरिड्स उल्का वर्षा में कभी-कभी बेहद चमकदार “फायरबॉल” भी दिखाई देते हैं, जो आकाश में लंबी चमकीली लकीर छोड़ते हैं। हालांकि यह पर्सिड्स उल्का वर्षा या जेमिनिड्स उल्का वर्षा जितनी तीव्र नहीं होती, फिर भी इसका ऐतिहासिक महत्व और दृश्य आकर्षण इसे खास बनाता है।
बिना उपकरण के देख सकते हैं
इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी टेलिस्कोप या दूरबीन की जरूरत नहीं होती।
खुले और अंधेरे स्थान का चयन करें
मोबाइल और कृत्रिम रोशनी से दूर रहें
आंखों को अंधेरे में 20–30 मिनट तक अभ्यस्त होने दें
क्या है उल्का वर्षा?
जब पृथ्वी किसी धूमकेतु द्वारा छोड़े गए धूल-कणों के रास्ते से गुजरती है, तो ये कण वायुमंडल में प्रवेश कर जल उठते हैं। यही चमकदार लकीरें हमें “टूटते तारे” के रूप में दिखाई देती हैं।
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, “उल्का वर्षा प्रकृति की अपनी आतिशबाजी है। थोड़ा धैर्य और सही समय चुनकर कोई भी व्यक्ति इस अद्भुत नजारे का आनंद ले सकता है।”
➡️ अगर मौसम साफ रहा, तो 22-23 अप्रैल की रात आसमान में यह दुर्लभ नजारा देखने का शानदार मौका होगा।
Budaun Amarprabhat