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हाई-फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रॉनिक्स में मशीन लर्निंग और डीप न्यूरल नेटवर्क की अहम भूमिका

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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन, 90 शोध पत्र प्रस्तुत

मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आईसीडीटीआईएस-2026 का समापन हुआ। कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (सीसीएसआईटी) और फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग (एफओई) की ओर से आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश के शोधकर्ताओं ने 90 शोध पत्र प्रस्तुत किए।

दिल्ली विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक साइंस विभाग के डॉ. बिस्वजीत मुखर्जी ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि हाई-फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रॉनिक्स की जटिल चुनौतियों के समाधान में मशीन लर्निंग (एमएल) और डीप न्यूरल नेटवर्क (डीएनएन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये तकनीकें आंकड़ों और अनुभवों से सीखकर सटीक पूर्वानुमान लगाने तथा बेहतर सिस्टम डिजाइन तैयार करने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में मानवीय विशेषज्ञता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का समन्वय अधिक प्रभावी समाधान उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

उन्होंने माइक्रोवेव और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में एआई तथा मशीन लर्निंग की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए पारंपरिक तकनीकों से आधुनिक एआई आधारित प्रणालियों तक के विकास की जानकारी दी।

सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, इंटेलिजेंट सिस्टम्स, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और स्मार्ट तकनीकों में नवीन अनुसंधान एवं नवाचार पर चर्चा की गई। सम्मेलन का आयोजन अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के सहयोग से किया गया।

इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। सीसीएसआईटी के वाइस प्रिंसिपल प्रो. डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि शोधकर्ताओं को सैद्धांतिक अध्ययन के साथ समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक, मजबूत और टिकाऊ तकनीकी मॉडल विकसित करने चाहिए।

सम्मेलन की संयोजक डॉ. शालिनी निनोरिया ने उम्मीद जताई कि आईसीडीटीआईएस-2026 डिजिटल क्रांति और एआई के दौर में नए विचारों, सार्थक विमर्श और नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

समापन अवसर पर आईटी विशेषज्ञ प्रो. एसएस ठाकुर सहित डॉ. नूपा राम चौहान, डॉ. रूपल गुप्ता, डॉ. मोहन विशाल गुप्ता, प्रो. प्रदीप कुमार और अन्य शिक्षक एवं शोधकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सुश्री गौरवी प्रजापति ने किया।


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